स्वर्गीय जीत सिंह नेगी शताब्दी समारोहउत्तराखंड के कालजयी लोकगायक जीत सिंह नेगी को उनकी पुण्यतिथि पर किया गया याद

उत्तराखंड के कालजयी लोकगायक जीत सिंह नेगी को उनकी पुण्यतिथि किया गया याद

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नई दिल्ली : उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में एवं गढ़वाल हितैषिणी सभा, गढभारती व उत्तराखण्ड फिल्म एवं नाट्य संस्थान के सहयोग से गढ़वाल भवन, नई दिल्ली में रविवार 21 जून, 2026 को उत्तराखण्ड के कालजयी लोकगायक, गीतकार, नाटककार जीत सिंह नेगी जी को याद किया गया

ज्ञातव्य हो उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली नेगी जी की शताब्दी वर्ष मना रहा है । इस श्रृंखला में लगातार आयोजन हो रहे हैं। नेगी जी की पुण्यतिथि के मौके पर उन्हें उनके गीतों, कविता व संस्मरणों से याद किया गया। इस मौके पर कई साहित्यकार, पत्रकार, गायक, समाज के प्रबुद्ध लोग समेत नेगी जी के परिजन भी उपस्थित थे।

उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संयोजक दिनेश ध्यानी ने कहा कि स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी का शताब्दी वर्ष समारोह आज से शुरु हो गया है। हमरी कोशिश रहेगी कि पूरे साल नेगी जी पर कुछ न कुछ आयोजन होते रहे । इसके लिए जीत सिंह नेगी शताब्दी समारोह समिति का गठन किया जायेगा ताकि सभी आयोजन सुचारु व बढ़िया तरीके से सम्पन्न हों। अगले साल 2 फरबरी, 2027 को उनकी याद में एक विराट आयोजन किया जायेगा।
श्री ध्यानी जी ने कहा कि स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी भी चाहते थे कि गढ़वाली, कुमाउनी भाषा संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हो। इसलिए हम लगातार कोशिश कर रहे हैं कि सरकार गढ़वाली, कुमाउनी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करे। उन्होंने कहा स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी ही सबसे पहले गायक थे जिनके गीतों का ग्रामोफोन रिकॉर्ड 1949 में यंग इंडिया ग्रामोफोन कंपनी ने सबसे पैली जारी किया था । स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी रेडियो के भी भी सबसे पहले गढ़वाली लोकगायक माने जाते हैं। ऑल इंडिया रेडियो से भी नेगी जी के गीत व नाटक ‘शाबासी मेरो मोती ढांगा’ सबसे पहले प्रसारित हुआ।

इस अवसर पर संगीतकार राजेन्द्र चौहान ने कहा कि नेगी जी पर ऐसे आयोजनों में हमें भी शामिल किया जाता तो बढ़िया रहता, हम नेगी जी को संगीतमय श्रद्धांजली दे सकते थे। माता पार्वती देवी चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बरिष्ठ समाजसेवी महावीर सिंह राणा ने कहा कि ऐसे आयोजनों के लिए हम तन, मन, धन से उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच के साथ हैं । कोटद्वार से आए शिक्षाविद डॉ कलम कुमार ने कहा कि ध्यानी जी और उनके साथ जुड़े साहित्यकार लगातार अपनी भाषा की सेवा कर रहे हैं। हम भी इस यज्ञ में अपना सहयोग देने के लिए तैयार हैं । वहीं बरिष्ठ पत्रकार, हिमालयी लोग यू ट्यूब चैनल के संयोजक डॉ हरीश लखेड़ा ने कहा कि ऐसे मंचों से जब कोई बात समाज में जाती है तो उसका बहुत बढ़ प्रभाव होता है। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की पुत्री मधु नेगी ने अपने पिता जी के संस्मरण और उनके गीतों द्वारा माहौल को भावपूर्ण बना दिया। बरिष्ठ रंगकर्मी, कवि उमेश बंदूनी ने उनके साथ व्यतीत किये गए अपने संस्मरणों का उल्लेख किया। युवा कवि संदीप गढ़वाली ने मंच से राजेंद्र चौहान जी से आग्रह किया कि यदि आप महाकौथिग में एक दिन का आयोजन स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी पर रखेंगे तो शताब्दी वर्ष में वो सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जिसका सब लोगों समेत राजेन्द्र चौहान जी ने भी समर्थन किया। बृजमोहन वेदवाल, निर्मला नेगी, वीरेन्द्र जुयाल ऊपिरि, नीरज बावड़ी, द्वारिका चमोली, सुनील थपलियाल घंजीर आदि लोगों ने नेगी को अपने अपने तरीके से गीत, कविता, संस्मरण आदि द्वारा श्रद्धांजलि दी। बरिष्ठ रंगकर्मी, साहित्यकार दर्शन सिंह रावत व निर्मला नेगी ने नेगी जी की जीवनी पढ़ी।

स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी का लोकप्रिय गीत ‘तू होली उंचि डांड्यूं मा बीरा-घसियारी का भेष मां-खुद मा तेरी सड़क्यां-सड़क्यों रूणूं छौं परदेश मा 1950 के दशक की शुरूआत में रेडियो रेडियो में प्रसारित हुआ था । इस गीत को सुनकर देश, प्रदेश व उत्तराखण्ड के घर-गौं में सब मंत्रमुग्ध हो गए थे। नेगी जी का जन्म 2 फ़रवरी, 1925 को पौड़ी गढ़वाल के अयाल गांव में सुलतान सिंह नेगी व रूपदेवी नेगी जी के घर में हुआ था। नेगी जी की मृत्यु 21 जून, 2020 को हुई। स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की पत्नी का नाम श्रीमती विमला नेगी था। नेगी जी के पिताजी उस जमाने में सरकारी सेवा में थे जिस कारण वो करांची, बर्मा आदि जगहों पर अपने पिताजी के साथ रहे और वहीं उनकी पढाई लिखे भी हुई। बर्मा (म्यांमार) से नेगी जी का पहला गीत रिकॉर्ड हुआ था।

नाटकों की बात करें तो स्वर्गीय जीत सिंह नेगी के निर्देशन में 1954-1955 में दिल्ली में आयोजित गढ़वाली नाटक ‘भारी भूल’ का मंचन हुआ । उस दौर में नेगी जी के गीत और नाटक मुंबई-दिल्ली-चंडीगढ़ समेत देश के कई प्रमुख शहरों में श्रोताओं-दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उस समय नेगी जी ने गढ़वाल के जन मानस के जीवन के अछूते भावों को अपने नाटकों में संगीतमय प्रस्तुतियां दी जो लोगों के दिलों में सदा के लिए छप गए। लोक संस्कृति, लोक गीत अर लोक जीवन को जीने वाले हिमालय जैसे विराट मनुष्य जीत सिंह नेगी का निधन 21 जून, 2020 क धर्मपुर, देहरादून में हुआ।
उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच की मांग है कि लोक संस्कृति के युगपुरुष स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की सौवीं जयंती पर उत्तराखंड की धरती पर कोई विराट आयोजन होना चाहिए। हमारे लोक के गीतकार, गायक व स्वनामधन्य कलाकारों को भी आगे आकर जीत सिंह नेगी जी की सौवीं जयंती को यादगार बनाने के लिए पूरी कोशिश करनी चाहिए। उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली की पूरी कोशिश रहेगी कि अगले वर्ष जीत सिंह नेगी जी की सौवीं जयंती पर विराट आयोजन किया जाए।

इस आयोजन में स्वर्गीय जीत सिंह नेगी जी की सुपुत्री मधु नेगी, मंजू नेगी समेत राजेंद्र चौहान, महावीर सिंह राणा, चंद्र किशोर नैथानी, चारु तिवारी, विकास चमोली, राजेंद्र चमोली, उमेश बंदूनी, बृजमोहन वेदवाल, दीपा पंत, मंजू मैखुरी, मंजू भट्ट, धर्मेंद्र प्रकाश, दर्शन सिंह रावत, विक्रम नेगी, डॉ हरीश लखेड़ा, संयोगिता ध्यानी, रविंद्र सिंह रावत, सौरभ पंत, वीरेंद्र सिंह, हंसी, रामपाल किमोली, शेखर भट्ट, गौरी रावत, डॉ कमलेश कुमार, सुनील थपलियाल घंजीर, ओंकार सिंह कोहली, नीरज बावड़ी, सुबोध थपल्याल, निर्मला नेगी, , द्वारिका चमोली, अनिल कुमार पंत, संदीप घनशाला गढ़़वाली, रूद्र घनशाला, वीरेन्द्र जुयाल उपिरि, नागेश बलोधी, रेनू उनियाल, देवांक लुथियाल, वीरेंद्र कुमार, धीरेन्द्र गुसाईं, आदि लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संयोजक दिनेश ध्यानी ने किया।