दिल्ली स्थित स्थानीय आयुक्त कार्यालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम ज्ञापन सौंपते उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों का प्रतिनिधिमंडलदिल्ली के उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की मुख्यमंत्री धामी से गुहार, चिन्हीकरण में अखबार की कतरनों को भी मिले मान्यता

दिल्ली के उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों की मुख्यमंत्री धामी से गुहार, चिन्हीकरण में अखबार की कतरनों को भी मिले मान्यता

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नई दिल्ली : उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी कमेटी, दिल्ली के अध्यक्ष मनमोहन सिंह के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम ज्ञापन उत्तराखंड के रेजिडेंट कमिश्नर अजय मिश्रा को सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि लंबे समय से लंबित राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण का मामला जल्द सुलझाया जाएगा।

मनमोहन सिंह ने कहा कि उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने के आंदोलन में दिल्ली के जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर हजारों लोगों ने वर्षों तक संघर्ष किया। आंदोलनकारियों ने पुलिस की लाठियां खाईं, अपनी नौकरी और रोज़गार तक छोड़ दिए, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा नहीं मिला है। इसके कारण वे सरकार द्वारा मिलने वाले किसी भी लाभ से वंचित हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जारी हालिया शासनादेश (जीओ) में आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण के लिए अखबारों की कतरनों को साक्ष्य के रूप में अमान्य कर दिया गया है। इस फैसले से दिल्ली में रहने वाले आंदोलनकारियों में गहरा रोष है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि शासनादेश के तहत आवेदन की अंतिम तिथि 25 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। उन्होंने मांग की कि चिन्हीकरण प्रक्रिया में अखबारों की कतरनों को भी मान्य साक्ष्य के रूप में शामिल किया जाए, ताकि आंदोलन में सक्रिय रहे सभी वास्तविक आंदोलनकारियों का नाम सूची में जुड़ सके और उन्हें न्याय मिल सके।

ज्ञापन सौंपने के दौरान कमेटी के संरक्षक अनिल पंत, खुशहाल सिंह बिष्ट, किशोर रावत, शिव सिंह रावत, राम सिंह सहित कई आंदोलनकारी उपस्थित रहे।