देहरादून में लेखक गांव अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव-2026 के समापन समारोह में मंच से संबोधित करते उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।देहरादून : लेखक गांव अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव-2026 का भव्य समापन, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने की शिरकत

लेखक गांव अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव-2026 : उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के थानो स्थित देश के पहले लेखक गांव में चल रहे पांच दिवसीय लेखक गांव अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव-2026 का गुरुवार को भव्य समापन हो गया। इस ऐतिहासिक समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने शिरकत की। साहित्य, कला और संस्कृति के इस वैश्विक महाकुंभ में दुनिया भर के विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा और भाषाई समृद्धता पर गहरा मंथन किया।

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वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति का शंखनाद

25 अक्टूबर से शुरू हुए इस लेखक गांव अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव में 60 से अधिक देशों के लेखक, कवि, साहित्यकार और संस्कृतिकर्मी शामिल हुए। समापन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह महोत्सव वैश्विक पटल पर देवभूमि उत्तराखंड और भारतीय संस्कृति का मान बढ़ाने वाला एक अद्भुत प्रयास है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि हिमालय की शांत वादियों में स्थापित यह लेखक गांव अब वैश्विक स्तर पर रचनात्मकता और विचार-विमर्श का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।

मुख्यमंत्री धामी ने इस अभिनव पहल के लिए कार्यक्रम के संरक्षक व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के विजन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देवभूमि से उठी साहित्य की यह गूंज पूरे विश्व को जोड़ने का काम करेगी।

महोत्सव की मुख्य विशेषताएं और झलकियां

  • राष्ट्रगीत से शुरुआत: समापन समारोह के सत्रों का औपचारिक शुभारंभ दीप प्रज्वलन, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
  • वैचारिक विमर्श: लेखक गांव अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव के दौरान विभिन्न विषयों पर 32 से अधिक ज्ञानवर्धक सत्र आयोजित किए गए, जिसमें संयुक्त राष्ट्र (UN) में हिंदी को स्थान दिलाने और हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण पर चर्चा की गई।
  • स्थानीय बोलियों को सम्मान: महोत्सव में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी उत्तराखंड की स्थानीय भाषाओं के कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांधा।
  • सांस्कृतिक विविधता: स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय और संस्कृति विभाग द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भारत की समृद्ध विरासत की झलक पेश की।

तकनीक के युग में मानवीय संवेदनाओं का महत्व

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में भी साहित्य की असली ताकत मानवीय संवेदनाओं और मौलिक सोच में ही सुरक्षित है। उन्होंने युवा पीढ़ी से अपनी मातृभाषा का सम्मान करने और किताबों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

इस लेखक गांव अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव के समापन सत्र के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, महोत्सव की निदेशक विदुषी निशंक समेत कई देशों के राजनयिक, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और प्रख्यात साहित्यकार मौजूद रहे।