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देहरादून
: उत्तराखंड रजत जयंती के अवसर पर दो दिवसीय विधानसभा सत्र के दौरान तीखी नोक झोंक देखने को मिली। चर्चा के दौरान एक बार फिर पहाड़ और मैदान का मुद्दा गरमाया। इस पर तीखी नोक झोंक भी देखने को मिली।
देहरादून
भाजपा विधायक विनोद चमोली ने स्थाई निवास के अहम मुद्दे पर बात रखते हुए कहा कि इन 25 वर्षों में किसी ने भी स्थाई निवास पर कभी कोई चर्चा नहीं कि जबकि इधर उधर से आकर 15 साल पहले उत्तराखंड में बसे लोगों को अस्थाई निवासी घोषित कर दिया और स्थाई निवास को ही भुला दिया गया। इस पर विपक्षी सांसदों ने उन्हें टोकते हुए कहा कि वे प्रदेश को पहाड़ और मैदान पर बांट रहे हैं। लेकिन विनोद चमोली ने कहा कि वे तो केवल उत्तराखंड के मूल निवासियों की बात रख रहे हैं। मूल निवास को लागू करने के लिए इस पर समीक्षा होनी चाहिए।
वहीं सांसद उमेश कुमार ने मुखर होकर कहा कि मूल निवास की बात आप कर रहे हैं लेकिन गैरसैंण राजधानी बनाने की बात क्यों नहीं कर रहे, इस पर चर्चा कीजिये न। हम आज तक राज्य को एक स्थाई राजधानी तक नहीं दे पाए।
बसपा विधायक शहजाद ने दिखाया आइना
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बसपा विधायक शहजाद ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमें पहाड़ मैदान नहीं करना चाहिए हम सभी उत्तराखंड प्रदेश के निवासी हैं। जो भी यहां पहाड़ की बात कर रहा है वो खुद पहाड़ में नहीं रहना चाहता
। विधायक बनते ही आपने अपने घर देहरादून या फिर हल्द्वानी में बना लिए हैं। आप लोग पहाड़ का विकास चाहते हैं तो पहाड़ में रहकर कीजिये। उन्होंने कहा आपने पलायन आयोग बनाया उस पर चर्चा क्यों नहीं की। लेकिन उनके द्वारा टिहरी विस्थापन को वापिस लेने की बात पर टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय भड़क गए और उन्होंने इसका कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि तोड़ दो डैम, अगर हमने पानी देना बंद कर दिया तो प्यासे मर जाओगे। इस पर दोनों तरफ से फिर नोक झोंक होने लगी। शहजाद ने कहा कि आप पहाड़ से पलायन कैसे रुके, रोजगार कैसे देंगे, लघु उद्योग को वहां क्यों नहीं डेवलप कर रहे, इस पर चर्चा करो ना।
बसपा विधायक शहजाद ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमें पहाड़ मैदान नहीं करना चाहिए हम सभी उत्तराखंड प्रदेश के निवासी हैं। जो भी यहां पहाड़ की बात कर रहा है वो खुद पहाड़ में नहीं रहना चाहता
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