नई दिल्ली : डी.पी.एम.आई., न्यू अशोक नगर, दिल्ली के सभागार में संस्थान के संस्थापक डॉ विनोद बछेती एवं ब्रह्मर्षि जगदाचार्य डॉ. गौरीशंकराचार्य जी महाराज, पीठाधीश पशुपति पीठ दिल्ली, के सान्निध्य में मासिक साहित्यिक संगोष्ठी संपन्न हुई।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीलगुली पूजन एवं मांगल गीत से हुआ, जिसे डॉ. हेमा उनियाल एवं सुनीता जुयाल ने प्रस्तुत किया। जिसके उपरांत अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
कार्यक्रम में वयोवृद्ध साहित्यकार वल्लभ डोभाल के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सुशील बुड़ाकोटी ‘शैलांचली’ ने उनकी रचनाओं ‘सैनिक संवाद’, ‘तिब्बत की बेटी’, ‘बुल्डोजर’ और ‘कही अनकही’ के मार्मिक अंश प्रस्तुत कर उन्हें भावपूर्ण स्मरण किया।
सुदूर नेपाल के धनगढ़ी से पधारे डॉ. देबेन्द्र प्रसाद भट्ट को साहित्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए एवं पिथौरागढ़ से पधारे डॉ. पीताम्बर अवस्थी को समाज-शिक्षा एवं निःस्वार्थ सामाजिक सेवाओं के लिए अंगवस्त्र, प्रशस्तिपत्र एवं पुष्पादि से सम्मान किया गया।

प्रशस्ति का हिंदी में संयोजन सुशील बुड़कोटी ‘शैलांचली’ ने, रूपांतरण नेपाली भाषा में मंजुला अवस्थी ने, गढ़वाली में गोविंद राम पोखरियाल ‘साथी’ ने और कुमाउनी में हेमा जोशी ने किया। प्रशस्तियों के हस्ताक्षरकर्ता कुसुम रावत ‘जगमोरा’; संरक्षक पजल परिवार, ज्ञानेंद्र पुरी, वायुसेना अधिकारी (से.नि.); गजेंद्र सिंह बटोही, साहित्यकार संपादक, चंदन मनराल, समाज सेवी; राज कुमार बड़थ्वाल, आई आर एस (से.नि.), अध्यक्ष उत्तरायणी एवं अध्यक्ष बड़थ्वाल कुटुम्ब हैं। प्रशस्तियों की रूप सज्जा रावत डिजिटल और विद्या प्रकाशन ने की। प्रशस्तियों का वांचन ओम ध्यानी एवं ओम प्रकाश पोखरियाल ने किया।
डॉ भट्ट ने ‘शरीर विज्ञान’ नामक नेपाली भाषा की कविता से सब का मन मोह लिया। नशामुक्ति, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में डॉ अवस्थी के कार्यों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
ब्रह्मर्षि जगदाचार्य डॉ. गौरीशंकराचार्य जी महाराज जी ने एक दोहे- ‘बहु बीती छोटी रही, पलपल गई बिताए/एक प्रहर के कारण, क्यों कलंक लग जाए’ के व्याख्यान के साथ बताने की कोशिश की किस तरह नृतकी के इस साहित्यिक दोहे को सुनकर राजगुरु, राज कुमारी, राजकुंवर, खुद राजा और नृतकी के जीवन में परिवर्तन आया। उन्होंने कहा कि साहित्य प्रकृति का श्रृंगार है। और साहित्यकार प्रकृति का संरक्षक एवं संवाहक है।
डॉ. कुसुम भट्ट ‘शोभनी’ एवं उनकी आदिनाद ग्रुप की टीम ने द्रोपदी की पाण्डव वार्ता शैली में पारंपरिक वाद्ययंत्रों, कोरस एवं एकल प्रस्तुति के माध्यम से मनमोहक लोक-सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। आदिनाथ ग्रुप के साथी सदस्यों सुप्रसिद्ध संगीतकार एवं लोक गायक राकेश सिंह गुसाईं, महेश गंधर्व, हेमंत सिंह नेगी, मोहित शर्मा, अक्षय राणा, हर्षित बडोला, दीपिका बिष्ट और सिमरन चमोली इत्यादि की शानदार प्रस्तुति रही। डॉ कुसुम भट्ट ‘सोभनी’ ने कहा कि आदिनाद ग्रुप द्वारा यह उनकी पहली प्रस्तुति है।
इस अवसर पर संगोष्ठी के आयोजक जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’ के 1300 पजल पूर्ण होने की उपलब्धि भी विशेष रूप से मनाई गई। उपस्थित साहित्य प्रेमियों को पंचमेवा, रोट, नारियल एवं भेली का प्रसाद वितरित किया गया। पजल के माध्यम से पहाड़, लोकभाषा, संस्कृति, इतिहास और लोकस्मृति को जोड़ने के इस सतत प्रयास को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया।
उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के संरक्षक डॉ विनोद बछेती ने कहा कि मासिक साहित्यिक संगोष्ठी द्वारा हर महीने भाषा, संस्कृति साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले दो लोगों को हिंदी, नेपाली, गढ़वाली, कुमाउनी एवं जौनसारी भाषा में प्रशस्ति सम्मान दिया जाना भाषा के संरक्षण में महत्वपूर्ण प्रयास है।
कार्यक्रम में ब्रह्मर्षि जगदाचार्य डॉ. गौरीशंकराचार्य जी महाराज की गरिमामय उपस्थिति रही। वे लगभग चार दशकों से दिल्ली में आध्यात्मिक क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी कृति ‘गुरु गीता’ प्रकाशित है तथा भागवत-विवेचन से संबंधित ग्रंथ प्रकाशन की ओर अग्रसर हैं।
समग्र आयोजन ने लोकभाषा, साहित्य, लोककला, सामाजिक सेवा और आध्यात्मिक चेतना को एक मंच पर लाते हुए दिल्ली में उत्तराखंड एवं नेपाल की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में सार्थक संदेश दिया।
संगोष्ठी में जौनसारी में खजान दत्त शर्मा एवं चारु रावत, कुमाऊनी में दीपा पंत तथा गढ़वाली में ओम ध्यानी, रोशन लाल, वीरेंद्र जुयाल ‘उपिरि’ सहित रचनाकारों ने सुंदर काव्यपाठ किया।
समारोह में मंजुला अवस्थी, शशि जोशी, कमला रावत, निर्मला रावत, आशा नेगी, जयपाल सिंह रावत, चंदन प्रेमी, खुशहाल सिंह बिष्ट, पार्थसारथि थपलियाल, जबर सिंह कैंतुरा, डॉ पृथ्वी सिंह केदारखंडी, विश्वेश्वर प्रसाद सिल्सवाल, उमेश बंदूणी, ओम प्रकाश पोखरियाल, रमेश सोनी, इंद्रजीत सिंह रावत, नागेंद्र सिंह रावत, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, डॉ सत्यनारायण अंगिरा विश्वबंधु, इंदिरा प्रसाद उनियाल, संदीप गढ़वाली (घनशाला), रविंद्र गुडियाल, दिग्विजय बिष्ट, राम सिंह (जयाड़ा) रावत, हरीश असवाल, हुकम सिंह तोपाल, जितेंद्र बिष्ट, महावीर बिष्ट, रविंद्र सिंह पंवार, किसन सिंह गुसाईं, चमन सिंह रावत, रमन ध्यानी, आनंद कुमार, त्रिलोक सिंह कड़ाकोटी, श्याम सुंदर सिंह कड़ाकोटी, बहादुर सिंह बिष्ट, वीरेंद्र सिंह बिष्ट, आनंद कुमार, अभिषेक गुसाईं, राजेंद्र सिंह इत्यादि साठेक साहित्य प्रेमियों की गरिमामय उपस्थिति रही।
जगमोहन सिंह रावत ‘जगमोरा’
आयोजक
मासिक साहित्यिक संगोष्ठी, दिल्ली
