चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड की लोक संस्कृति और अगाध आस्था का प्रतीक माँ नन्दा जात यात्रा 2026 अपने पूरे वैभव के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। दिनांक 12 सितम्बर 2026 को यात्रा के अंतर्गत तीनों ऐतिहासिक परगनों की पवित्र देव डोलियां श्रद्धालुओं के भारी हुजूम और सुरक्षा व्यवस्था के बीच अपने-अपने निर्धारित पड़ावों पर रात्रि विश्राम हेतु सुरक्षित पहुंच चुकी हैं। दुर्गम रास्तों और कठिन चढ़ाइयों के बावजूद भक्तों के अटूट विश्वास और भक्ति का कारवां हर पल इस पावन यात्रा को एक नई ऊर्जा दे रहा है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!निर्धारित पड़ावों पर देव डोलियों का भव्य स्वागत
हिमालय की वादियों में गूंजते माँ नन्दा के जयकारों के बीच तीनों परगनों की डोलियों ने आज का सफर तय किया। स्थानीय प्रशासन और चमोली पुलिस की कड़ी निगरानी में डोलियां निम्नलिखित पड़ावों पर विश्राम कर रही हैं:
- परगना दशोली की डोली: दशोली परगना की आराध्य डोली आज शाम अपने तय पड़ाव रामणी पहुंची। यहाँ ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों और मंगल गीतों के साथ डोली की अगवानी की।
- परगना बधाण की डोली: बधाण क्षेत्र की देव डोली आज के सफर के बाद धरा तल्ला में रात्रि विश्राम कर रही है। डोली के दर्शन के लिए आस-पास के गांवों से भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।
- परगना बण्ड क्षेत्र की डोली: बण्ड क्षेत्र की पवित्र डोली भी आज अपने गंतव्य रामणी पड़ाव पर पहुंच चुकी है। यहाँ श्रद्धालुओं का एक भव्य समागम देखने को मिल रहा है।
कठिन रास्तों पर भी भारी पड़ा ‘भक्ति का कारवां’
पहाड़ की विषम भौगोलिक परिस्थितियों और खड़ी चढ़ाइयों के बाद भी माँ नन्दा के प्रति आस्था रत्ती भर भी कम नहीं हुई है। बुजुर्ग, युवा और महिलाएं सभी नंगे पैर और हाथों में पारंपरिक छत्र (छंतोली) लिए आगे बढ़ रहे हैं। जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ रही है, इस भक्ति का कारवां में नए-नए गांवों के श्रद्धालु स्वतः ही जुड़ते जा रहे हैं। रास्ते में जगह-जगह स्थानीय लोगों द्वारा डोलियों पर फूलों की वर्षा की जा रही है और यात्रियों के लिए भंडारे व ठहरने की व्यवस्था की जा रही है।
सुरक्षा और सेवा में मुस्तैद पुलिस बल
चमोली पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें यात्रा मार्ग पर लगातार सक्रिय हैं। दुर्गम संकरे रास्तों और संवेदनशील मोड़ों पर पुलिस के जवान मुस्तैदी से तैनात हैं ताकि इस भक्ति का कारवां को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। यात्रियों की स्वास्थ्य जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी समय-समय पर पड़ावों पर मुस्तैद दिखाई दे रही हैं।
माँ नन्दा की यह पावन जात यात्रा उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर रही है। कल सुबह की पहली किरण के साथ ही माँ नन्दा की डोलियां पूजा-अर्चना के बाद अपने अगले दुर्गम पड़ावों की ओर प्रस्थान करेंगी।
