पोखरी : जनपद चमोली में नगर पंचायत पोखरी के तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक 20वें हिमवत कवि चंद्र कुंवर बर्त्वाल खादी ग्रामोद्योग एवं पोखरी शरदोत्सव मेला के पांचवें दिन मुख्य मंच पूरी तरह से उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया। पहाड़ों की परंपरा, अनूठी विरासत और सामाजिक चेतना का अद्भुत संगम इस दौरान देखने को मिला। मेले के इस पांचवें दिन विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से आए महिला मंगल दलों ने अपनी बेहतरीन और भावपूर्ण प्रस्तुतियों से मुख्य पंडाल में मौजूद हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से जीवंत हुई पहाड़ की विरासत
पोखरी शरदोत्सव मेला के सांस्कृतिक सत्र का शुभारंभ मुख्य मंच पर अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद स्थानीय और सीमावर्ती क्षेत्रों से आए विभिन्न ग्राम पंचायतों के महिला मंगल दलों ने पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोकगीतों और लोकनृत्यों की ऐसी समां बांधी कि पूरा मेला क्षेत्र तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। महिला मंगल दलों ने झुमेलो, थड्या और चौंफला नृत्यों के माध्यम से पहाड़ के लोक जीवन, उसकी कठिनाइयों और उत्सवों को बेहद खूबसूरती के साथ दर्शकों के सामने जीवंत किया। उनकी इन प्रस्तुतियों में पहाड़ की अनूठी और समृद्ध लोक संस्कृति की अनुपम छटा साफ तौर पर बिखरती हुई दिखाई दी, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा।
नशे के खिलाफ नाटक ने दिया गहरा सामाजिक संदेश
मेले के इस विशेष पड़ाव पर केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि एक बेहद महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी समाज के बीच प्रसारित किया गया। पोखरी शरदोत्सव मेला के मंच से स्कूली छात्र-छात्राओं ने वर्तमान समय में समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी को खोखला कर रहे नशे के दुष्प्रभावों पर आधारित एक बेहद मार्मिक और विचारोत्तेजक नाटक की शानदार प्रस्तुति दी। इस नाटक के माध्यम से बच्चों ने दिखाया कि किस प्रकार नशा एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह से तबाह कर देता है। नाटक के भावुक दृश्यों और दमदार संवादों ने वहां उपस्थित दर्शकों की आंखों को नम कर दिया और लोगों को नशे के खिलाफ एकजुट होने के लिए प्रेरित किया। इस प्रस्तुति की पूरे मेला परिसर में जमकर सराहना की गई।
रंगोली और चित्रकला में दिखा बच्चों का हुनर
मुख्य मंच के इतर, मेले के पांचवें दिन विद्यालयी छात्र-छात्राओं के बीच विभिन्न रचनात्मक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। रंगोली और चित्रकला प्रतियोगिताओं में बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी अद्भुत कलात्मक प्रतिभा का लोहा मनवाया। छात्र-छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से जहां उत्तराखंड की पारंपरिक कला, पर्यावरण संरक्षण और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसे विषयों को सुंदर रंगों से उकेरा, वहीं चित्रकला प्रतियोगिता में पहाड़ के प्राकृतिक सौंदर्य, पारंपरिक काष्ठकला और ग्रामीण परिवेश को कागज़ पर उतारा। इन प्रतियोगिताओं ने पोखरी शरदोत्सव मेला के शैक्षणिक और रचनात्मक महत्व को और अधिक बढ़ा दिया। निर्णायक मंडल द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं का चयन किया गया, जिन्हें मेले के समापन अवसर पर पुरस्कृत किया जाएगा।
हजारों दर्शकों की भारी भीड़ से गुलजार हुआ मेला क्षेत्र
जैसे-जैसे पोखरी शरदोत्सव मेला अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे स्थानीय जनता और आस-पास के क्षेत्रों से आने वाले प्रवासियों का उत्साह भी चरम पर पहुंचता जा रहा है। मेले के पांचवें दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भरपूर आनंद लेने के लिए मेला मंच पर सुबह से ही लोगों की भारी भीड़ जुटने लगी थी। दोपहर होते-होते मेला पंडाल दर्शकों से खचाखच भर गया और पैर रखने तक की जगह नहीं बची। हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शकों ने न केवल लोक कलाकारों का उत्साहवर्धन किया, बल्कि मेले में लगाए गए विभिन्न खादी, ग्रामोद्योग, कृषि और स्थानीय हस्तशिल्प के स्टालों पर जाकर जमकर खरीदारी भी की। नगर पंचायत प्रशासन द्वारा दर्शकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, जिससे मेले का संचालन बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आगे बढ़ रहा है।

