शुभ श्रावण शिवरात्रि पर दूध, जल और बेलपत्र से पूजे जा रहे अलौकिक शिवलिंग का क्लोज-अप शॉट135 साल बाद अद्भुत महासंयोग: 'मृत्यु लोक' की भद्रा समाप्त होते ही शिवालयों में उमड़ा जनसैलाब, 'बोल बम' के जयकारों से गूंजी धरती

135 साल बाद अद्भुत महासंयोग: ‘मृत्यु लोक’ की भद्रा समाप्त होते ही शिवालयों में उमड़ा जनसैलाब, ‘बोल बम’ के जयकारों से गूंजी धरती

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नई दिल्ली : श्रावण मास की शिवरात्रि पर आज पहाड़ से लेकर मैदान तक आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है, जैसा पिछले एक सदी में नहीं देखा गया। पूरे 135 वर्षों के बाद बन रहे कई दुर्लभ और अलौकिक ज्योतिषीय संयोगों के बीच आज देश भर के शिवालय ‘जय बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गुंजायमान हैं। सुबह से ही श्रद्धालु और कांवड़िए भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए कतारों में खड़े नजर आए।

चार महायोगों और ग्रहों का अनूठा संगम

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष की श्रावण शिवरात्रि बेहद खास है क्योंकि आकाश मंडल में एक साथ कई बड़े योग बन रहे हैं। इस पावन अवसर पर गजकेसरी योग, गुरु आदित्य योग, बुध आदित्य योग और पंचग्रही योग का महासंयोग बना है।
इसके साथ ही, आज मंगलवार का विशेष दिन है जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। आज पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र के साथ सिद्धि योग का मिलन हो रहा है। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं और चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में विराजमान हैं, जहाँ देवगुरु बृहस्पति भी उनके साथ शुभ स्थिति में गोचर कर रहे हैं। इस अद्भुत स्थिति के कारण श्रद्धालुओं पर भगवान शिव-माता पार्वती के साथ-साथ मंगल, बृहस्पति, शनि और चंद्रमा की विशेष कृपा बरस रही है।

मृत्यु लोक’ की भद्रा का था साया, दोपहर 3:25 के बाद शुरू हुआ महा-अभिषेक

इस बार शिवरात्रि की शुरुआत के साथ ही एक अत्यंत संवेदनशील ज्योतिषीय स्थिति भी बनी थी। चतुर्दशी तिथि आज प्रातः 4:55 बजे प्रारंभ हुई थी और इसी के साथ कर्क राशि यानी ‘मृत्यु लोक’ (पृथ्वी लोक) की भद्रा भी शुरू हो गई थी।

शास्त्रों और विद्वानों के अनुसार, मृत्यु लोक की भद्रा में कोई भी शुभ कार्य या जलाभिषेक करना वर्जित और अशास्त्रसम्मत माना जाता है। इसी कारण ज्योतिषाचार्यों ने श्रद्धालुओं को भद्रा काल में जलाभिषेक न करने की सलाह दी थी। यह भद्रा काल आज अपराह्न (दोपहर) 3:25 बजे समाप्त हो चुका है। भद्रा का साया हटते ही सभी प्रमुख मंदिरों और शिवालयों में महा-जलाभिषेक का सिलसिला और तेज हो गया है, जो अब रात्रि के चारों प्रहरों तक पूरी श्रद्धा के साथ चलेगा।

भक्ति के रंग में रंगा देश

हरिद्वार, काशी, देवघर से लेकर देश के कोने-कोने में स्थित छोटे-बड़े शिव मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया है। पवित्र नदियों से गंगाजल लेकर लौटे लाखों कांवड़ियों ने भद्रा समाप्त होते ही पूरी शुद्धता के साथ शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। जानकारों का मानना है कि इस महासंयोग में की गई पूजा भक्तों के सभी कष्टों को दूर कर मनोवांछित फल देने वाली है।