देहरादून: उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों के फटने से होने वाली संभावित आपदाओं (GLOF) के खतरे को कम करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश की बेहद संवेदनशील ग्लेशियर झीलों के व्यापक सर्वेक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ दल को रवाना कर दिया गया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) मुख्यालय से इस दल को हरी झंडी दिखाई। इस बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील अभियान के लिए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी तथा आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने विशेषज्ञ दल को अपनी शुभकामनाएं दी हैं।
इन दो प्रमुख और दुर्गम झीलों का होगा अध्ययन
इस चरण में विशेषज्ञ दल चमोली जनपद में स्थित सरस्वती ताल और उत्तरकाशी जनपद में स्थित केदारताल का गहन सर्वेक्षण करेगा। ये दोनों झीलें अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित हैं, जिनमें:
- सरस्वती ताल: लगभग 5,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
- केदारताल: लगभग 4,750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
13 झीलें संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित, 4 का सर्वे पूरा
सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को पुख्ता करने के लिए कुल 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है। सरकार इन सभी झीलों का चरणबद्ध तरीके से वैज्ञानिक अध्ययन करा रही है। इनमें से 04 ग्लेशियर झीलों का सर्वेक्षण पहले ही सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है, और शेष झीलों के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है।
आधुनिक तकनीक और अर्ली वार्निंग सिस्टम से लैस होगा क्षेत्र
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अभियान के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ग्लेशियर झीलों की वर्तमान स्थिति, उनके जलस्तर, आकार में होने वाले बदलाव और आसपास के भू-भाग की स्थिति का सटीक आकलन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि संभावित खतरे की स्थिति में निचले इलाकों (डाउनस्ट्रीम) तक समय रहते सूचना पहुंचाना सबसे जरूरी है। इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में:
- आधुनिक सेंसर (Modern Sensors)
- जलस्तर मापक उपकरण (Water Level Gauges)
- उन्नत संचार प्रणाली (Advanced Communication Systems)
तथा अन्य आवश्यक तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि किसी भी आपात स्थिति में प्रभावी कदम उठाए जा सकें। आपदा प्रबंधन मंत्री श्री मदन कौशिक ने भी कहा कि संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सभी जरूरी सुरक्षात्मक एवं जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर तेजी से काम चल रहा है।
देश के शीर्ष वैज्ञानिक संस्थान और सुरक्षा बल शामिल
इस चुनौतीपूर्ण मिशन को अंजाम देने के लिए विशेषज्ञ दल में देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों और सुरक्षा बलों के दिग्गजों को शामिल किया गया है। इस दल में निम्नलिखित विभागों के विशेषज्ञ शामिल हैं:
- उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) और ULMMC
- वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (Wihg)
- बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP), लखनऊ
- राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (NIH), रुड़की
- राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF)
- नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM)
इस अवसर पर राज्य सलाहकार समिति (आपदा प्रबंधन विभाग) के उपाध्यक्ष श्री विनय रुहेला, ले. कर्नल रघुवीर सिंह भण्डारी (सेवानिवृत्त), एसीईओ (क्रियान्वयन) डीआईजी श्री राजकुमार नेगी तथा जेसीईओ श्री दिनेश कुमार पुनेठा सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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