टिमरू





जोशीमठ:
टिमरू के औषधीय गुणों को देखते हुए सगंध पौधा केंद्र सेलाकुई प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी खेती के लिए किसानों को जागरूक करने का काम कर रहा है। केंद्र द्वारा प्रशिक्षित कई गांवों के किसान वर्तमान में इसकी खेती कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

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सगंध पौधा केंद्र के चमोली जिला प्रभारी महेंद्र सिंह ने बताया कि प्रदेश में टिमरू  की खेती  को बढ़ावा देने के लिए किसानों को जागरूक करने के साथ साथ प्रशिक्षित किया जा रहा है। सगंध पौधा केंद्र के माध्यम से वर्तमान में जनपद के पीपलकोटी, पाखी, गरुड़गंगा, हेलंग, द्विंग, तपोवन, पाताल गंगा, लंगसी आदि गांवों के किसान इसकी खेती कर रहे हैं जिससे उन्हें अच्छी आमदनी भी प्राप्त हो रही है। 




ग्रामीणों का कहना है कि टिमरू का प्रयोग वर्षों पूर्व से दांतुन के अलावा आयुर्वेदिक दवा बनाने में भी किया जाता रहा है। इसके अलावा इसके पत्तों की चटनी भी खूब स्वादिस्ट होती है जो पेट के रोगों में लाभकारी है। यही नहीं यदि टिमरू के पौधों को खेतों के किनारे लगाया जाय तो ये बाड़ का काम करती है। इसका पौधा कांटेदार होता है यदि यह खेतों के किनारे लगा होगा तो जंगली सुवरों से खेतों को बचाया जा सकता है। वर्तमान में इसके बीज की कीमत करीब चार हजार रुपये किलो है, जिससे यह अच्छी आमदनी देने में कारगर सिद्ध हो रहा है। पौधा केंद्र के जिला प्रभारी ने बताया कि जिले के अधिक से अधिक किसानो को इससे जोड़ने का प्रयास लगातार जारी है।