दिल्ली में होगा गढ़वाली, कुमाऊनी
और जौनसारी भाषाओं का राष्ट्रीय
सम्मेलन।
दिल्ली: उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच, दिल्ली के तत्वावधान में उत्तराखंडी साहित्यकारों एवं संगठनों के सामुहिक प्रयास से आगामी 29 जनवरी एवं 30 जनवरी 2022 को गढ़वाल भवन, पंचकुइया रोड़ में गढ़वाली भाषा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है जिसमें देश भर से साहित्यकार और भाषाविद प्रतिभाग करेंगे। इस सम्मेलन में गढ़वाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने हेतु ज्ञापन एवं दस्तावेजों का संकलन किया जायेगा। भाषा मानकीकरण एवं व्याकरण आदि पक्षों पर भी विचार किया जाएगा।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उत्तराखण्ड लोक-भाषा साहित्य मंच के संयोजक दिनेश ध्यानी ने बताया कि इस आयोजन के बाद कुमाऊनी भाषा पर अलग से सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। पहले गढ़वाली और कुमाउनी भाषा पर एक साथ सम्मेलन करने पर विचार किया जा रहा था लेकिन विचार विमर्श के बाद यह तय हुआ कि एक साथ दोनों भाषाओं पर सटीक चर्चा नहीं हो पायेगी इसलिए अलग अलग आयोजन उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली द्वारा आयोजित किए जाएंगे। जौनसारी भाषा के साहित्य पर चर्चा के लिए अलग से जौनसारी भाषा पर भी इसके बाद अलग से सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। हमारा आप सभी साहित्य प्रेमियों और साहित्यकार, लेखकों से अनुरोध है कि इस दिशा में सकारात्मक सहयोग करने का कष्ट करें और हमारी भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने वाली इस मुहिम में सहभागी बनें। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि आप लोगों का सहयोग और मार्गदर्शन हमें बराबर मिलता रहेगा।
जैसा कि आप जानते हैं उत्तराखण्ड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली डा. विनोद बछेती जी के संरक्षण में महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल साहित्य सम्मान और गढ़वाली, कुमाऊनी भाषा शिक्षण कक्षाओं का संचालन करता आ रहा है। अन्य कई भाषाई और साहित्यिक सरोकारों से मंच लगातार जुड़ा हुआ है। इस हेतु आप सभा साहित्यकारों, कवियों एवं भाषा प्रेमियों का सतत सहयोग मिलता रहता है। आप सभी हमारे लिए प्रमुख हैं सबका नामोल्लेख संभव नहीं है। इसलिए आइए इस साहित्य कुंभ में अपना-अपना सहयोग दें और हमारी भाषाओं की बात को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाने में सारथी बनें।
कार्यक्रम के समन्वयक अनिल पंत ने कहा कि अपनी भाषाओं पर यह दिल्ली सम्मेलन-2022 निश्चित मील का पत्थर साबित होगा। तो आइए हम सब मिलकर आगे बढ़ें और अपनी भाषा, साहित्य, संस्कृति के विकास में अपने सहयोग के लिए संपर्क करें ।
दिनेश ध्यानी, संयोजक
9319667106
अनिल पन्त, समन्वयक
9819342205
