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भांग से निर्मित बिल्डिंग का आज पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह

रावत ने किया उद्घाटन

उत्तराखंड: युवा नम्रता कंडवाल, गौरव दीक्षित और दीपक कंडवाल की कंपनी गोहेम्प एग्रोवेंचर्स द्वारा पौड़ी के यमकेश्वर ब्लॉक के कंडवाल गांव फल्दाकोट मल्ला में भांग मटीरियल से बिल्डिंग का निर्माण किया गया है। ये लोग काफी लंबे समय से इस कार्य में जुटे हुए थे। 

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उत्तराखंड में बर्बाद हो रहे भांग के वेस्ट को बिल्डिंग मटीरियल में तब्दील कर इन युवाओं ने उससे  बिल्डिंग का निर्माण किया है जिसका आज बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उद्घाटन किया। इन लोगों का दावा है कि भारत में भांग से पहली बार बिल्डिंग का निर्माण किया गया है। 

गोहेंप एग्रोवेंचर्स कैसे इस व्यवसाय से जुड़ा 

नम्रता ने बताया कि दिल्ली में आर्किटेक्ट की पढ़ाई के बाद वो अपने गाँव वापस लौट आयीं। और स्टार्टअप के रूप में से यहीं अपने पति गौरव दीक्षित और भाई दीपक कंडवाल के साथ मिलकर इंडस्ट्रियल हेम्प पर रिसर्च करने वाले गोहेम्प एग्रोवेंचर्स की शुरूआत की। अपने शुरुआती दिनों में भांग के बीज और रेशे से दैनिक उपयोग की चीजें बनाना आरंभ किया इसी क्रम में काफी शोध के बाद हमने पहाड़ पर बहुतायत में उगने वाले भांग के पौधों को सकारात्मक रूप से रोजगार का जरिया बनाने का सोचा और इस पौधे से बिल्डिंग मटीरियल भी इज़ाद किया। उनका मानना है कि इससे न सिर्फ भांग के प्रति लोगों का नजरिया बदलेगा, बल्कि पहाड़ के गांवों से होने वाले पलायन पर भी रोक लग सकेगी। उन्होंने बताया कि भांग की लकड़ी, चूने और कई प्रकार के मिनरल को मिलाकर बिल्डिंग मटीरियल तैयार किया जा सकता है। और आप ने भी सुना होगा कि प्राचीन भारत में भी इस तरह की टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जाता था। एलोरा की गुफाओं में इसका प्रयोग देखने को मिलता है। 

अगर इस पर गहन शोध किया जाए तो इससे मिलने वाले अनेकों फायदों के बारे में हमें पता चलेगा। भांग से तैयार बिल्डिंग के अलावा स्वदेशी तकनीकी से भारत में निर्मित देश की पहली हेंप डेकोर्टिकेटर मशीन भी उत्तराखंड में गोहेंप एग्रोवेंचर्स स्टार्टअप द्वारा लाई गई है। भांग से तैयार मटीरियल हल्का होता है और कमरे को गर्मी में ठंडा और सर्दी में गरम रखता है व चूने के उपयोग से अग्निरोधक व एंटीफंगल होने के साथ साथ सीलन को भी नहीं आने देता तथा इससे भवन की उम्र सैकड़ों साल बढ़ जाती है। 

आज जिस तरह भांग की लकड़ी को किसान जला रहा है ऐसे में हेंप डेकोर्टिकेटर मशीन की सहायता से उनके रेशे निकालकर कपड़ा, कागज, इथेनॉल, बायो प्लास्टिक, बिल्डिंग मैटेरियल जैसी इंडस्ट्री में रेशे की खपत पूरी की जा सकती है। ऐसे करने से प्रदेश में एक बिल्कुल नई हेंप फाइबर इंडस्ट्री की स्थापना हो सकती है जो कि प्रदेश से पलायन रोकने में कारगर सिद्ध होगा।