टीएचडीसी द्वारा समिति से जनप्रतिनिधियों को हटाने व टेहरी झील का जल स्तर बढ़ाने से आशिंक प्रभावित गांवों को भारी जान माल के नुकसान की संभावना-ग्रामीणों में आक्रोश

टेहरी :बांध प्रभावितों हेतु बनाई गई टीएचडीसी समिति के मनमाने रवैये के कारण समिति से जुड़े जनप्रतिनिधि व टेहरी झील से प्रभावित गांवों के लोग डर के साये में जीने को मजबूर है और शासन-प्रशासन उनकी बात को सुनने के लिए कतई  तैयार नहीं है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार बांध प्रभावितों हेतु संपर्श्विक क्षति नीति-2013 के अंतर्गत उक्त नीति को वर्ष-2021 में संशोधित कर गैर-तकनीकी जनप्रतिनिधियों को इससे जुडी समिति से हटा दिया गया है और टीएचडीसी द्वारा झील का जल स्तर भी 830 मीटर बढ़ा दिया गया है जो कि लोगों के घरों तक पहुँच चुका है जिससे आंशिक प्रभावित गांवों को भारी जान माल का नुकसान होने की संभावना उत्पन्न हो गई है । चूंकि समिति से जनप्रतिनिधों को पहले ही हटा देने से जनता का पक्ष रखने का अधिकार ही छीन लिया गया है जो कि जनता को गुमराह करने जैसा कृत्य है।  

ग्रामीणों व सामाजिक कार्यकर्ता सागर भंडारी ने बताया कि गैर तकनीकी सदस्यों और जनप्रतिनिधियों को हटाने के निर्णय से क्षेत्र के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि हम उक्त प्रकरण के सम्बन्ध में अपने स्तर पर प्रयास करेंगे कि सरकार की इस से  संबधित संस्था और विभाग इस पर त्वरित कारवाही करे। यदि एक सप्ताह के अंतर्गत कोई सकारात्मक कार्यवाही न हुई तो ग्रामीणों को मजबूरन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।  

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