स्वर कोकिला लता मंगेशकर अब हमारे बीच नहीं रही पर जिंदा रहेंगी
उनकी यादें नई दिल्ली: 92 वर्ष की स्वर कोकिला लता मंगेशकर पिछले एक महीने से कोरोना से लड़ रही जंगआखिरकार हार गई डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित किया। इस दुःखद खबर से न केवल फ़िल्मी दुनिया में अपितु देश के सभी संगीतप्रेमी शौक में डूब गए हैं। दीदी के चले जाने से संगीत जगत में सन्नाटा पसर गया है। 



बता दें कि लता मंगेशकर विगत माह 8 जनवरी को कोरोना से संक्रमित पाई गई थी जिसके बाद से ही वो बम्बई के ब्रीच क्रैंडी अस्पताल में भर्ती थी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था । डॉक्टरों के मुताबिक 29 जनवरी को उनकी हालत में थोड़ा सुधार हुआ है और उन्हें वेंटिलेटर से हटाकर आईसीयू में रखा गया था किन्तु उनकी तबियत फिर से बिगड़ने पर उन्हें दोबारा वेंटिलेटर पर रखा था किंतु वह यह जंग हार गई और  अपनी अमिट यादों को छोड़ वे इस दुनिया से विदा हो गई।
 





भारतीय सिनेमा में सैकड़ों कालजयी गानों को अपनी आवाज देने वाली दीदी लता मंगेशकर ने अपने इस सफर की शुरुआत सन 1942 में महज 13 साल की उम्र से किया था। उन्होंने भारत की विभिन्न भाषाओँ में कुल 30 हज़ार गाने गाए हैं। वे मधुर आवाज की धनि थी जिस वजह से उन्हें सुर साम्राज्ञी भी कहा जाता है। उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण और दादा साहेब फाल्के पुरुस्कार के अलावा भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी नवाजा गया है। 

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