लाखों रूपये किलो बिकने वाली हिमालयी कीड़ा जड़ी को DRDO के वैज्ञानिकों ने किया लैब में तैयार 

देहरादून : बहुत ही दुर्लभ जड़ीबूटी जो अब तक केवल बर्फ से ढके पहाड़ों में बमुश्किल मिला करती थी उसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की जैविक इकाई जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान ने लंबे शोध के बाद लैब में तैयार किया है। इस सफलता के बाद उसने इसकी व्यवसायिक रूप से उत्पादन की तैयारी शुरू कर ली है। करीब 20  से 25 लाख रूपये किलो में बिकने वाली इस कीड़ा जड़ी का उत्तराखंड, गुजरात और केरल की लैबों में दस गुना लागत के साथ उत्पादन किया जाएगा।  यारसा गांबू के नाम से जानी जाने वाली इस जड़ी में  विटामिन, प्रोटीन व पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार की दवाएं और शक्तिवर्धक उत्पाद बनाने में होता है । 

उत्तराखंड के ऊंचाई वाले स्थानों के बर्फीले पहाड़ों जहाँ तापमान पांच से दस डिग्री के आसपास होता है में कीड़ा जड़ी प्राकृतिक रूप से उगती है। करीब छह से आठ महीनों के बाद जब बर्फ पिघलने लगती है तब यह जड़ी नज़र आती है। प्राकृतिक रूप से भूरे रंग की इस कीड़ा जड़ी की लंबाई लगभग 2 इंच होती है।


डिबेर के वैज्ञानिकों ने इसी तापमान को ध्यान में रखते हुए इसे लैब में तैयार किया है जो गुलाबी रंग की दिखाई देती है और पांच से सात सेंटीमीटर की लंबाई लिए होती है। 

डिबेर के वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह ने बताया कि हल्द्वानी स्थित हमारी लैब में इसका सफल परिक्षण हो चुका है और इसका उत्पादन भी किया जाने लगा है।  यह जड़ी एक ख़ास तरह के कीड़े की फफूंद से तैयार होती है। जल्द ही व्यावसायिक बाजार में ये जड़ी आपको दिखाई देने लगेगी। 

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