गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी भाषा सीखने का सुनहरा अवसर 

नई दिल्ली : उत्तराखंड प्रवासी या कोई अन्य गढ़वाली, कुमाउनी और जौनसारी भाषा सीखना चाहता है तो आजकल दिल्ली एनसीआर और उत्तराखंड में लगभग 25 जगहों पर इसकी क्लासें चल रही है। आप इस अवसर का अवश्य लाभ उठायें। 

उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली 2016 से ही इन कक्षाओं का आयोजन करते आ रहा है। मंच के संयोजक दिनेश ध्यानी ने बताया कि अपनी भाषा के सरंक्षण हेतु भावी पीढ़ी को अपनी भाषा का ज्ञान होना अति आवश्यक है इसीलिए हम प्रयास कर रहे हैं कि इन कक्षाओं के माध्यम से बच्चे व वयस्क अपनी मातृभाषा का ज्ञान अर्जित करें। 

कक्षाओं की आयोजन प्रबंध समिति के सदस्य ने बताया कि समाज में अपनी भाषा की अलख जल चुकी है इसका प्रमाण ये है कि दिल्ली एनसीआर से शुरू हुई मुहीम अब उत्तराखंड के श्रीनगर और देहरादून तक पहुंच चुकी है और वहां भी अब गढ़वाली, कुमाउनी, जौनसारी भाषा की कक्षाएं आयोजित हो रही हैं। लोगों का भाषा के प्रति रुझान बढ़ रहा है। 

भाषा की इस मुहीम में अहम योगदान देने वाले आयोजन के संरक्षक डॉ. विनोद बछेती जी ने कहा कि हम पूरी सावधानी बरतते हुए कोविड नियमों का पालन करते हुए ही कक्षाओं का आयोजन कर रहे है और हमारे सभी गुरुजन कक्षाओं को सुचारु रूप से चलाने में सक्षम हैं। हम चाहते हैं कि हर उत्तराखंडी अपनी बोली-भाषा में बात करे। 

वहीं आयोजन के समन्वयक अनिल पंत ने दिव्य पहाड़ को बताया कि इन कक्षाओं का संचालन प्रत्येक शनिवार और रविवार को केवल 2 घंटे के लिए किया जा रहा है। ये कक्षाएं रविवार 15 मई से प्रारम्भ हो चुकी है।  यदि कोई भाषा को सीखना चाहता है या फिर अपने क्षेत्र में सेंटर खोलना चाहता है तो अधिक जानकारी के लिए हमारे कंट्रोल रूम में 9968502496,9818342205,9810537435  पर संपर्क करें। उन्होंने बताया कि कक्षाओं का आयोजन दिल्ली पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट न्यू अशोक नगर के अलावा विनोद नगर, खोड़ा, बुराड़ी, महरौली, मयूर विहार फेज-3, तिमारपुर, संगम विहार, नरेला, आया नगर, मुनीरका, आर के पुरम, सेक्टर- 7, वैशाली, इंद्रापुरम, साहिबाबाद आदि जगहों के अलावा गढ़वाल के श्रीनगर और देहरादून पर किया जा रहा है। 

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