पांडव लीला




जोशीमठ से संजय कपरवाण की रिपोर्ट 

जोशीमठ : आजकल उत्तराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग जनपदों में पांडव लीलाओं का आयोजन बड़ी धूम धाम से किया जा रहा है। सीमान्त धार्मिक एवं पर्यटन नगरी जोशीमठ मे पाण्डव नृत्य के तहत गैंडा बध कार्यक्रम का आयोजन हुआ, इस मौके पर श्रद्धालुओं की खूब भीड़ उमड़ी। आज पांडव नवगंगा मे स्नान व तर्पण करंगे।

बीते 21 दिसंबर से शुरू हुए पांडव नृत्य आयोजन मे  बृहस्पतिवार को गैंडा बध से पूर्व पांडवो ने ढोल दमाऊ की थाप व पंडवाड़ी गायन के साथ नृत्य किया।




मान्यता है कि पांडवो को महाभारत युद्ध मे पित्र दोष हो जाता है,इस दोष से मुक्त होने के लिए कुल पुरोहित सलाह देते है कि वे गैंडे की खगोती से अपने पित्रों का तर्पण करें।

जोशीमठ के नरसिंह मंदिर मठागण मे गैंडा बध आयोजन को देखने के लिए दूर दूर से लोग पहुंचे थे, अर्जुन हाथी पर सवार होकर आयोजन स्थल पहुंचे और गैंडे का बध किया। आज इसी गैंडे की खगोती से नवगंगा नोग मे पांडव पित्र दोष मुक्ति के निमित्त तर्पण करंगे।




गौरतलब है कि पांडव नृत्य देवभूमि उत्तराखंड का प्रमुख धार्मिक आयोजन है, पांडव नृत्य के माध्यम से पांडवो की पूजा-अर्चना करने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है।

भू-धंसाव के साये के बीच देवपुजाई समिति जोशीमठ ने इस धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया,कड़ाके की ठंड के बावजूद लोग लोग प्रतिदिन पांडव नृत्य देखने के लिए नरसिंह मंदिर मठागण पहुंचे।




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