उत्तराखंड रोडवेज

DEHRADUN : उत्तराखंड में सफर करने वालों को एक बार फिर परेशानी का सामना करना पड़ सकता हैं। उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को नजर अंदाज़ किए जाने पर प्रदेश भर में 3 अक्टूबर से कार्यबहिष्कार का किया ऐलान । 

मंगलवार को उत्तराखंड परिवहन निगम कर्मचारी संयुक्त मोर्चा की बैठक में पहले से निर्धारित 27 सितंबर रात 11 बजे से चक्का जाम को वापस लेते हुए प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन का ऐलान कर दिया है । मोर्चा का कहना है कि 11 सितंबर को परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक को आंदोलन का नोटिस दिया था। इससे पूर्व 6 अप्रैल को दिए गए नोटिस पर 25 अप्रैल को शासन और निगम स्तर पर वार्ता सकारात्मक हुई थी। जुलाई में दोबारा द्विपक्षीय वार्ता के बाद आश्वासन मिले, लेकिन सहमति बन जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। ऐसे में उनके पास आंदोलन का ही विकल्प है। 

मोर्चा संयोजक अशोक चौधरी ने बताया कि बैठक में तय किया गया कि 27 सितम्बर से होने वाला चक्काजाम को स्थगित कर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया गया है। इसके तहत प्रदेशभर में अलग अलग तिथियों में सम्पूर्ण कार्यबहिष्कार किया जायेगा। इसकी शुरुआत 3 अक्टूबर को देहरादून में गढ़वाल मंडल के परिवहन कर्मचारियों द्वारा आईएसबीटी में प्रदर्शन के साथ पूरे दिन कार्यबहिष्कार से होगी। 5 अक्टूबर को हल्द्वानी बस स्टेशन, 6 अक्टूबर को टनकपुर में तो 10 अक्टूबर को प्रदेशभर में प्रदर्शन और कार्यबहिष्कार किया जायेगा। परिवहन निगम के प्रदेश भर के सभी कर्मचारी 10 अक्टूबर को देहरादून सचिवालय में प्रदर्शन करेंगे और इसी दिन रात से ही पूर्ण चक्काजाम किया जाएगा। 

परिवहन निगम कर्मचारी इन मांगों के पूरा होने का है इंतजार 

  • संविदा परिचालकों को सुनवाई का मौका दिए बिना सेवा समाप्त करने पर रोक लगाई जाए।
  • सभी संवर्गों में रिक्त पदों पर तत्काल पदोन्नति की जाए।
  • जनवरी से सितंबर 2017 के सातवें वेतनमान एरियर का भुगतान किया जाए।
  • मृतक आश्रितों को निगम में नियमित सेवा के लिए अप्रैल में सहमति लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं।
  • संविदा, आउटसोर्स विशेष श्रेणी चालक-परिचालक को सेवानिवृत्ति या मृत्यु पर दो लाख ग्रेच्युटी का आज तक आदेश नहीं।
  • अवैध बस संचालन रोकने के लिए पुलिस-परिवहन की संयुक्त टीम की कार्रवाई आज तक नहीं, पांच ई-बसों का अवैध संचालन जारी।
  • सभी कार्मिकों, तकनीकी संवर्ग कार्मिकों को भी एसीपी का लाभ दिया जाए।
  • आईएसबीटी का स्वामित्व परिवहन निगम को दिया जाए।
  • निगम में 600 नई बसें खरीदी जाएं, अनुबंधित बसों के नए अनुबंध पर रोक लगाई जाए।
  • ऑनलाइन वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि में एकरूपता अपनाई जाए।
  • संविदा, विशेष श्रेणी चालक-परिचालक, आउटसोर्स कर्मियों के लिए अलग से सेवा नियमावली बनाई जाए।
  • आउटसोर्स एजेंसी की अनियमितता पर प्रतिभूति जब्त करते हुए मुकदमा दर्ज कराया जाए।

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