उत्तराखंड : जनपद चमोली का पूर्णा गांव आया खतरे की जद में भूधसांव और पानी निकलने से घरों में आई दरारें





कर्णप्रयाग :
चमोली जिले  में आफत कम होने का नाम नहीं ले रही। आये दिन हो रहे भूस्खलनों से लोग डर के साये में जी रहे हैं।  ल्वाणी, धरातल्ला, मोपाटा में भू-धंसाव के बाद पूर्णा गांव भी भू- धंसाव की चपेट में आ गया हैं। यहां घरों के पास पानी निकलने से 15 मकानों में दरारें पड़ गई हैं। बारिश व धूप से घरों की दरारें अधिक चौड़ी होती जा रही है। खतरे को देखते हुए अधिकांश ग्रामीण अपने घरों काे छोड़ राहत शिविर में शरण लेने को मजबूर हैं।

जिन लोगों के मकानों में दरारें आई है, उनमें अधिकांश मजदूरी करते हैं। लोगों के घरों के साथ गोशालाएं भी है, जिनमें भी मोटी दरारें आ गई है। जिसकी वजह से वे अपने पालतू जानवरों को खुले में रख रहे हैं। अंधेरा होते ही ग्रामीण राहत शिविर में जा रहे हैं। 60 लोग रात को प्रशासन द्वारा तैयार जीएमवीएन के पर्यटन आवास गृह राहत शिविर में ठहर रहे हैं।  घर के आस पास दो से तीन इंच पानी निकलने से खतरा बना हुआ है।




पूर्णा गांव की प्रधान सीमा देवी व कनिष्ठ उपप्रमुख पिंकी देवी ने प्रशासन से आपदा प्रभावितों की मदद करने, गांव का भू-सर्वेक्षण कराये जाने की मांग की है। 

एसडीएम पंकज भट्ट ने बताया कि कई घरों में दरारें आई है। प्रशासन से जो भी संभव होगा मदद की जाएगी। 

देवाल विकासखंड के सेलखोला गांव में भी धंस रही जमीन 

सोमवार की रात्रि को सेलखोला गांव के उपर भू-धंसाव से कई घरों  के ऊपर  खतरा मंडरा रहा है। घरों के पीछे अचानक करीब तीन इंच पानी निकलने से लोगों के मकानों के आगे व पीछे जमीन धंस रही है। खतरे को देखते हुए गांव के आठ परिवारों ने अपने घर छोड़ कर देवाल बाजार के होटलों में शरण ली है। सभी परिवार स्वयं अपनी व्यवस्था पर होटल या अपने आसपास के संबंधियों के घरों में रह रहे हैं।

विधायक टम्टा पूर्णा व सेलखोला गांव के आपदा प्रभावितों से मिले

सोमवार को क्षेत्र के विधायक भूपाल राम टम्टा व एसडीएम पंकज भट्ट ने आपदा प्रभावित पूर्णा व सेलखोला ग्राम पंचायत पहुंचकर प्रभावितों को हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया। उन्होनें पूर्णा गांव में 16 राशन के किट दिए। कहा कि पूर्णा गांव के आपदा प्रभावितों के लिए जीएमवीएन के आवास गृह को राहत शिविर बनाया गया है।




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