आयुर्वेद दिवस पर आयुर्वेद चर्चा और स्थौल्य चिकित्सा एवं नियंत्रण पुस्तक का लोकार्पण


नई दिल्ली : आयुर्वेद दिवस के शुभ अवसर पर वनौषधि विद्यापति, आयुर्वेद गौरव डॉ. मायाराम उनियाल जी द्वारा आयुर्वेद  पर चर्चा तथा आयुर्वेद में वर्णित जटिल रोग स्थाैल्य  (मोटापा एवं मेदोवृद्धि) की चिकित्सा एवं नियंत्रण पुस्तक का लोकार्पण, उपाध्यक्ष, दिल्ली विधानसभा, माननीय श्री मोहन सिंह बिष्ट जी के कर कमलों द्वारा दिल्ली विधान सभा की मीटिंग हाल में, कई गणमान्य जनों की उपस्थिति में  संपन्न हुआ।

आयुर्वेदीय द्रव्यगुण विज्ञान के क्षेत्र में अद्वितीय कार्य करने वाले डॉ मायाराम उनियाल आयुर्वेद के विशिष्ट वैद्यों में अपना स्थान रखते हैं। वनौषधि के क्षेत्र में उनका कार्य अत्यंत सराहनीय रहा है। आप केवल पुस्तकीय विद्वान नहीं हैं अपितु निरंतर विभिन्न दुर्गम क्षेत्रों की यात्राएं कर वनौषधियों का प्रत्यक्ष ज्ञान आपने अर्जित किया है और उस प्राप्त ज्ञान को लेखबद्ध कर आयुर्वेद के साहित्य संवर्धन में आपने महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई  है।

श्रीलंका सरकार द्वारा “वनौषधि विद्यापति” उपाधि से विभूषित वैद्यराज डॉ मायाराम उनियाल जड़ी बूटियों के शोध एवं आयुर्वेद प्रचार हेतु  मॉरिशस, श्रीलंका, ब्राजील, बर्मा, नेपाल, सिंगापुर आदि देशों की यात्रा कर चुके हैं। आपके लगभग 450 से अधिक शोध पत्र विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। कई महत्वपूर्ण आयुर्वेदिक संस्थानों में आप  सलाहकार, विशेषज्ञ, वरिष्ठ वैज्ञानिक का दायित्व बखूबी निभा रहे हैं। डॉ.मायाराम उनियाल द्वारा दर्जनभर से अधिक ग्रंथों की रचना की गई  है जिनमें- 

(1) अष्टांग संग्रह की वनस्पतियां एवं उनका वर्गीकरण 

(2) प्रयोगात्मक अभिनव द्रव्यगुण विज्ञानम् (सचित्र)

(3)संस्कृत साहित्य में पर्यावरण एवं कालिदास की  वनस्पतियां ( सचित्र)

(4)बिहार के आदिवासी एवं जड़ी बूटियां ( सचित्र)

(5)आयुर्वेद अनुसंधान दर्शिका( सचित्र)

(6)उत्तराखंड हिमालय की वनौषधि एवं खनिज( सचित्र)

(7) भारत में जड़ी बूटियों का कृषिकरण( सचित्र)

(8) हिमालयी लुप्तप्राय कस्तूरी मृग एवं महौषधि कस्तूरी ( सचित्र)

(9)औषधीय पादपों का व्यावसायिक कृषिकरण ( सचित्र)

(10)लद्दाख की संस्कृति एवं परंपरागत चिकित्सा प्रणाली(सचित्र)

(11) उत्तराखंड वनौषधि दर्शिका( सचित्र)

(12) उत्तराखंड हिमालय की जड़ी बूटियां ( सचित्र)

(13) उत्तराखंड के हिम शिखरों पर दिव्य संजीवनी औषधियां ( सचित्र)

(14) रसोई घर के उपयोगी मसाले एवं शाक,सब्जियों से स्वास्थ्य।

(15) मेडिशनल फ्लोरा ऑफ गढ़वाल हिमालया ( सचित्र, अंग्रेजी)

(16) डॉ  मायाराम उनियाल अभिनंदन ग्रन्थ  विज्ञान खण्ड सहित ( सचित्र)

(17) अनुभूत लोक प्रचलित पारंपरिक जड़ी – बूटी चिकित्सा सार एवं दिव्य औषधियाँ ( दो भाग, सचित्र रंगीन)

(18) विश्वविख्यात सर्वमान्य चरक संहिता आयुर्वेद चिकित्सा के प्राचीन ग्रन्थ का विवेचन।

(19) देवलोक हिमालय के  हिमाद्रि बुग्यालों में चरक एवं सुश्रुतोक्त  दिव्यौषधियां ।

(20) आमची निघंटु: ( लद्दाख की पारंपरिक चिकित्सा एवं संस्कृति ,सचित्र)

(21)वेदों में वर्णित द्रव्यगुण विज्ञान( वेद और आयुर्वेद)

(22)आयुर्वेद में वय: स्थापन रसायन विधि एवं सिद्धांत ।

(23) युवा कैसे बनें ( प्रकाशाधीन) 

हेमा उनियाल  द्वारा वनौषधि  विद्यापति डॉ मायाराम उनियाल जी पर एक  डॉक्यूमेंट्री फिल्म  कुछ माह पूर्व  बनाई जा चुकी है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “वनौषधि विशेषज्ञ” के रूप में आपको जो पहचान मिली है वह आपकी सत्यनिष्ठा और कठोर परिश्रम के बल पर ही संभव हुआ है। जीवन के 85 से अधिक वसंत देख चुके डॉ.मायाराम आज भी वही ऊर्जा और लगन से आयुर्वेद साहित्य सृजन, शोध पत्र प्रकाशन और राष्ट्रीय आयुर्वेद अधिवेशन एवं अन्य  आयुर्वेद से संबद्ध प्रमुख कार्यक्रमों में शिद्दत  से अपनी उत्कृष्ट  भूमिका निभा रहे हैं। अभी कुछ माह पूर्व ही आपको प्रतिष्ठित धन्वंतरि पुरस्कार, 5 लाख की सम्मानित राशि सहित मुंबई में केंद्रीय आयुष मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा मैग्नम पुरस्कार, महामहिम राष्ट्रपति द्वारा रामनारायण शर्मा  राष्ट्रीय आयुर्वेद पुरस्कार, केंद्रीय आयुष मंत्रालय द्वारा प्रतिष्ठित “लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड” आपको दिया जा चुका है।आपके साथ एक नहीं, अनेकानेक सम्मान आपकी योग्यतानुसार जुड़े  हुए हैं।

आज की लोकार्पित पुस्तक “आयुर्वेद में वर्णित जटिल रोग स्थोल्य ( मोटापा एवं मेदोवृद्धि) की चिकित्सा एवं नियंत्रण, “प्रवेक कल्प प्राइवेट लिमिटेड”, नोएडा,उत्तरप्रदेश के सौजन्य से और लखेड़ा प्रिंटिंग  प्रेस, रोहिणी, दिल्ली से प्रकाशित हुई है। इसका मूल्य 300 रुपए है।

डॉ हेमा उनियाल 

(ग्रंथकार एवं वृत्तचित्र निर्मात्री)

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