श्रद्धा सच्ची हो तो राह बन ही जाती है: बदरीनाथ में दिव्यांग सोनालिका का सपना सच, फायर व पर्यटन कर्मियों ने पेश की इंसानियत की मिसाल
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बदरीनाथ धाम : कहा जाता है कि जब श्रद्धा सच्ची हो, तो भगवान स्वयं दर्शन का मार्ग प्रशस्त कर देते हैं। ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायक क्षण भू-वैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम में देखने को मिला, जहां एक शारीरिक रूप से असमर्थ महिला श्रद्धालु की अटूट आस्था और दो विभागीय कर्मचारियों के सेवा भाव ने मिलकर एक सपने को हकीकत में बदल दिया।
व्हीलचेयर पर तय हुआ मंदिर तक का सफर
ओडिशा के जनपद जजपुर की रहने वाली 35 वर्षीय सोनालिका पांडा (पुत्री श्री रमेश चंद पांडा) शारीरिक रूप से चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। इसके बावजूद उनके मन में भगवान बदरी विशाल के दर्शन की तीव्र इच्छा थी, जिसके चलते वे अपने परिवार के साथ धाम पहुंचीं। हालांकि, मंदिर तक पहुंचने की शारीरिक चुनौती उनके सामने खड़ी थी।
फायर और पर्यटन विभाग के कर्मचारियों ने पेश की मानवता की मिसाल
सोनालिका की इस परेशानी को साकेत तिराहे पर ड्यूटी पर तैनात फायर सेवा के कर्मचारी चंद्रमोहन और पर्यटन विभाग के कर्मचारी रोहित फर्स्वाण ने तुरंत भांप लिया। किसी भी औपचारिकता का इंतजार किए बिना, दोनों ने तत्काल सेवा का हाथ बढ़ाया। दोनों कर्मचारियों ने श्रद्धालु को सम्मानपूर्वक व्हीलचेयर पर बैठाया और पूरी आत्मीयता व सहयोग के साथ मुख्य मंदिर तक पहुंचाया।
दर्शन कर भावुक हुआ परिवार
इन देवदूतों की मदद से सोनालिका पांडा ने भगवान श्री बदरी विशाल के दिव्य और भव्य दर्शन किए। दर्शन करने के बाद सोनालिका और उनके परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू और चेहरे पर गहरा संतोष साफ झलक रहा था। परिजनों ने बदरीनाथ धाम में तैनात इन कर्मचारियों के सेवा भाव और उत्तराखंड पुलिस/प्रशासन की इस मानवीय पहल की जमकर सराहना की और उनका आभार जताया।
यह घटना दर्शाती है कि बदरीनाथ धाम में केवल तीर्थयात्रियों की भीड़ ही नहीं उमड़ती, बल्कि यहां मानवता और सेवा का वो रूप भी देखने को मिलता है जो हर किसी का दिल जीत लेता है।

