विशेष संवाददाता नोएडा, 09 सितंबर: बुरांस साहित्य एवं कला केंद्र द्वारा नोएडा के सेक्टर 12 स्थित सामुदायिक केंद्र में एक विशेष विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह गोष्ठी हिंदी के प्रतिष्ठित साहित्यकार दिवंगत बल्लभ डोभाल की तेरहवीं के संस्कार के उपरांत ‘हिमालय दिवस’ के अवसर पर आयोजित की गई। गोष्ठी का मुख्य विषय “शब्दों में हिमालय: बल्लभ डोभाल का साहित्यिक संसार और हिमालयी संवेदना” रखा गया, जिसमें साहित्य, पत्रकारिता और संस्कृति जगत की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत कर उन्हें भावभीनी साहित्यिक श्रद्धांजलि अर्पित की।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!हिमालय की आत्मा और पहाड़ की पीड़ा के चितेरे थे डोभाल: प्रोफेसर वेदवाल
गोष्ठी के संयोजक और बुरांस साहित्य एवं कला केंद्र के अध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर प्रदीप कुमार वेदवाल ने मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा कि बल्लभ डोभाल का साहित्यिक संसार केवल शब्दों का जाल नहीं है, बल्कि यह हिमालय के जनजीवन, वहां की अनूठी संस्कृति, संघर्ष और पलायन की पीड़ा का एक जीवंत दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि डोभाल जी ने पहाड़ की संवेदनाओं को अत्यंत ईमानदारी और गहराई के साथ अपने लेखन में उतारा।
वरिष्ठ बुद्धिजीवियों और साहित्यकारों ने साझा किए संस्मरण
गोष्ठी की शुरुआत उत्तर प्रदेश के पूर्व अपर आयुक्त (विधि) योगेन्द्र कुमार के संबोधन से हुई, जिन्होंने डोभाल जी के योगदान को अनुकरणीय बताया।
- वरिष्ठ पत्रकार सुषमा जुगरान ध्यानी ने कहा कि डोभाल जी ने हिमालय को महज एक भौगोलिक परिदृश्य नहीं माना, बल्कि उसे मानवीय चेतना के रूप में प्रतिष्ठित किया।
- प्रसिद्ध कथाकार पंकज बिष्ट ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उनकी पहली पुस्तक के प्रकाशन में डोभाल जी की मुख्य भूमिका थी।
- कथाकार महेश दर्पण ने उनके धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) प्रवास और वहां रचे गए अनुपम साहित्य का विशेष उल्लेख किया।
- लेखक मंगतराम धस्माना और चंद्र बल्लभ थपलियाल ने कहा कि डोभाल जी का जाना एक पूरे रचनात्मक युग का अंत है और वे अपने क्रांतिकारी लेखन के लिए सदैव अमर रहेंगे।
- साहित्यकार डॉ. हरिसुमन बिष्ट ने बल्लभ डोभाल के साथ नोएडा में रहकर बहुत कुछ सीखने और समझने की बात कही।
- राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के डायरेक्टर और भाजपा नेता बीरेन्द्र जुयाल ने युवा पीढ़ी से बल्लभ डोभाल के साहित्य को पढ़ने का आह्वान किया।
- डॉ. हेमा उनियाल ने साहित्यकार बल्लभ डोभाल से जुड़े आत्मीय संस्मरण साझा करते हुए कहा कि वे केवल एक बड़े साहित्यकार ही नहीं, बल्कि अत्यंत संवेदनशील, आत्मीय और नई पीढ़ी के रचनाकारों को प्रोत्साहित करने वाले व्यक्तित्व थे।
- लेखक मंगतराम धस्माना ने कहा कि किसी साहित्यकार का जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं होता, बल्कि उसके साथ अनुभवों, स्मृतियों और एक पूरे रचनात्मक संसार का एक अध्याय समाप्त होता है।
- वहीं शशि भूषण खंण्डूड़ी ने कहा कि बल्लभ डोभाल भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी रचनाएं उन्हें सदैव जीवित रखेंगी।
- चंद्र बल्लभ थपलियाल ने बल्लभ डोभाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सारगर्भित संबोधन में कहा कि बल्लभ डोभाल अपने क्रांतिकारी लेखन के लिए हमेशा याद रहेंगे।
- पत्रकार राजेश डंडरियाल ने बल्लभ डोभाल के साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए समाजिक संस्थाओं से समर्पित भाव से काम करने की बात कही।
नई पीढ़ी तक पहुंचेगी साहित्यिक विरासत
इस भावुक क्षण पर बल्लभ डोभाल की पुत्री प्रभा थपलियाल ने अपने पिता को नमन करते हुए कहा कि उनके पिता द्वारा रचा गया बल्लभ डोभाल का साहित्यिक संसार ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी और विरासत है। उन्होंने संकल्प लिया कि वे इस धरोहर को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम निरंतर करती रहेंगी। वहीं पत्रकार राजेश डंडरियाल ने सामाजिक संस्थाओं से इस साहित्य के व्यापक प्रचार-प्रसार की अपील की।
कई गणमान्य लोग रहे उपस्थित
श्रद्धांजलि सभा में स्वर्गीय डोभाल के सुपुत्र प्रकाश डोभाल, कैलाश डोभाल, अरुण डोभाल, नातिन शिवानी व अंचल सहित पत्रकारिता और साहित्य जगत से जुड़े नवोदित, विनोद शर्मा, कुसुम असवाल, आभा गांधी, हरीश असवाल और विनोद कबटियाल समेत सैकड़ों प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में माना कि भले ही डोभाल जी शारीरिक रूप से विदा हो गए हैं, लेकिन अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से वे हमेशा पाठकों के दिलों में जीवित रहेंगे।
