कर्णप्रयाग/चमोली। श्री बदरीश संस्कृत विद्यापीठ डिम्मर सिमली, कर्णप्रयाग में 21 सितंबर 2026 को संस्कृत शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सहायक निदेशक संस्कृत शिक्षा रुद्रप्रयाग/चमोली मनसाराम मैंदुली द्वारा रचित ‘सम्पूर्ण पूजन प्रकाश सौरभ’ ग्रंथ का विधिवत लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि पूरा आयोजन संस्कृत भाषा में संपादित किया गया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कार्यक्रम में कर्णप्रयाग विधानसभा क्षेत्र के विधायक अनिल नौटियाल मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। वहीं डी.पी. पुरोहित, सदस्य उत्तराखंड व्यापार मित्र परिषद (GST) एवं सह संयोजक न्यायिक मामले उत्तराखंड भाजपा, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जगदम्बा प्रसाद बेंजवाल, निदेशक भेषज संघ ने की। डिम्मर सिमली ग्राम सभा की प्रधान विनीता देवी सारस्वत एवं जगदम्बा चमोला अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

‘सम्पूर्ण पूजन प्रकाश सौरभ’ ग्रंथ का हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान ‘सम्पूर्ण पूजन प्रकाश सौरभ’ ग्रंथ का लोकार्पण अतिथियों की उपस्थिति में किया गया। ग्रंथ के लेखक मनसाराम मैंदुली, सहायक निदेशक संस्कृत शिक्षा रुद्रप्रयाग/चमोली हैं।
‘सम्पूर्ण पूजन प्रकाश सौरभ’ के लोकार्पण को संस्कृत शिक्षा और धार्मिक साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा गया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं संस्कृत प्रेमियों ने ग्रंथ के प्रकाशन के लिए लेखक को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के संयोजक मनसाराम मैंदुली रहे, जबकि श्री बदरीश संस्कृत विद्यापीठ डिम्मर सिमली के प्राचार्य माताराम पुरोहित की भी आयोजन में प्रमुख भूमिका रही।
संस्कृत भाषा में संपादित हुआ पूरा कार्यक्रम
कार्यक्रम की सबसे खास विशेषता यह रही कि आयोजन की विभिन्न गतिविधियां संस्कृत भाषा में संपादित की गईं। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति एवं परंपरा से संबंधित अनेक प्रस्तुतियां दीं।
विद्यार्थियों की इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों, शिक्षकों, अभिभावकों और संस्कृत प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा में अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर भी मिला।
विद्यार्थियों को पुस्तक के साथ बांटे गए कंबल
इस अवसर पर विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को स्वर्गीय संजय लाल शाह की पुण्य स्मृति में पुस्तक के साथ कंबल भी प्रदान किए गए।
आयोजकों के अनुसार विद्यार्थियों को पुस्तक उपलब्ध कराने का उद्देश्य अध्ययन के प्रति उनकी रुचि को बढ़ावा देना तथा उन्हें ज्ञानवर्धक सामग्री उपलब्ध कराना रहा। कंबल वितरण के माध्यम से विद्यार्थियों की जरूरत का भी ध्यान रखा गया।
संस्कृत शिक्षा से जुड़े कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में डा. अश्वनी, राजकीय जिला चिकित्सालय गोपेश्वर, संदीप प्रकाश गैरोला, प्रकाश डिमरी, सुभाष चंद्र नवानी, संस्कृत प्रवक्ता, चंद्र प्रकाश सती, सेवानिवृत्त कोषाधिकारी सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इसके अलावा प्राचार्य द्रवेश्वर थपलियाल, संस्कृत महाविद्यालय ज्योतिर्मठ, प्रधानाचार्य भोलादत्त सती, प्रधानाचार्य अरविंद पंत, प्रधानाचार्य नवीन सेमवाल, प्रधानाचार्य कैलाश सेमवाल, प्रधानाचार्य हरीश तोपवाल, प्रधानाचार्य शशिभूषण बमोला, प्रधानाचार्य सजीन्द्र प्रसाद नौटियाल, प्राचार्य वासुदेव सेमवाल, प्रधानाचार्य दिवाकर थपलियाल, कैलाश देवली, आचार्य नौटियाल, डिमरी, आर्य तथा सुरेंद्र सिंह नपलच्याल सहित अनेक शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में क्षेत्र के संस्कृत प्रेमी नागरिकों एवं पत्रकारों ने भी सहभागिता की।
संस्कृत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार पर जोर
कार्यक्रम में संस्कृत भाषा के अध्ययन, संरक्षण और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। ‘सम्पूर्ण पूजन प्रकाश सौरभ’ जैसे ग्रंथों के माध्यम से धार्मिक एवं भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विषयों को पाठकों और विद्यार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने यह भी संदेश दिया कि संस्कृत भाषा को शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़कर नई पीढ़ी में इसके प्रति रुचि विकसित की जा सकती है।
डा. प्रदीप सेमवाल ने किया कार्यक्रम का संचालन
कार्यक्रम का सफल संचालन डा. प्रदीप सेमवाल द्वारा किया गया। आयोजन के दौरान संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां प्रस्तुत की गईं।
श्री बदरीश संस्कृत विद्यापीठ डिम्मर सिमली में आयोजित यह कार्यक्रम संस्कृत शिक्षा, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण अवसर रहा। वहीं ‘सम्पूर्ण पूजन प्रकाश सौरभ’ ग्रंथ के लोकार्पण ने कार्यक्रम को विशेष रूप से उल्लेखनीय बनाया।

