उत्तराखंड : पहाड़ की जमीन पर बाहरी भूमाफिया का खेल! पौड़ी में अवैध टाउनशिप निर्माण ठप, डीएम ने दिए भूमि सौदा निरस्त करने और कड़ी कार्रवाई के आदेश

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

पौड़ी गढ़वाल : उत्तराखंड में बाहरी लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर भूमि खरीदने पर रोक लगाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा सख्त भू-कानून लागू किए जाने के बावजूद, रियल एस्टेट कंपनियों और स्थानीय भूमाफियाओं के गठजोड़ का एक बड़ा मामला सामने आया है। पौड़ी गढ़वाल के कोट ब्लॉक के सफदरखाल क्षेत्र अंतर्गत एटाड़ी गांव में नियमों को ताक पर रखकर बनाई जा रही एक अवैध टाउनशिप परियोजना पर प्रशासन ने पूरी तरह से रोक लगा दी है। स्थानीय लोगों व सामाजिक कार्यकर्ताओं की शिकायतों का स्वतः संज्ञान लेते हुए पौड़ी की जिलाधिकारी (DM) आईएएस स्वाति भदौरिया ने इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 145 नाली जमीन सौदे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी किए हैं।


122 नाली की हो चुकी थी रजिस्ट्री, चल रही थी बड़ी तैयारी

अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विवादित सौदे के तहत कुल 145 नाली कृषि भूमि में से 122 नाली की रजिस्ट्री पहले ही चोरी-छिपे की जा चुकी थी। दिल्ली की एक नामी रियल एस्टेट कंपनी ने पौड़ी के ही एक स्थानीय निवासी के साथ मिलकर इस जमीन को खरीदा था। कंपनी ने मौके पर पहुंच मार्ग (Access Road) का निर्माण भी शुरू कर दिया था और यहां आवासीय फ्लैटों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से लैस एक विशाल टाउनशिप बसाने का पूरा खाका तैयार कर लिया था।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनता ने खोला मोर्चा

इस अवैध निर्माण और बड़े पैमाने पर कृषि भूमि की खरीद-फरोख्त का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय निवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने इस पर तीखी आपत्ति जताई। कार्यकर्ताओं का साफ तौर पर आरोप है कि अत्यधिक मुनाफे वाले रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के लिए कृषि भूमि का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है, जो उत्तराखंड भू-कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह मामला इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि किस तरह भूमाफिया स्थानीय लोगों की मिलीभगत से कानून की कमियों (लोपहोल्स) का फायदा उठाकर बड़े भूखंड हड़प रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि ऐसे बेनामी और अनियंत्रित सौदे न केवल पहाड़ों की जनसांख्यिकी (Demography) को बिगाड़ते हैं, बल्कि मूल उत्तराखंडियों को उनके हक की जमीन से भी वंचित कर रहे हैं।

उच्चस्तरीय जांच समिति गठित, सौदा निरस्त करने की चेतावनी

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम स्वाति भदौरिया ने मौके पर चल रहे समस्त निर्माण कार्यों को तुरंत प्रभाव से बंद करवा दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अपर जिलाधिकारी (ADM) और उपजिलाधिकारी (SDM) सहित वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति को बेहद पारदर्शी और त्वरित तरीके से निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं ।क्या एटाड़ी गांव की इस 145 नाली जमीन की खरीद-फरोख्त कानूनी रूप से वैध थी?क्या इस सौदे में उत्तराखंड भू-कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया है?
क्या बिना आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियों के ही व्यावसायिक निर्माण कार्य शुरू किया गया?जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो इस भूमि सौदे (रजिस्ट्री) को तुरंत निरस्त (Cancel) कर दिया जाएगा। इसके साथ ही दिल्ली की रियल एस्टेट एजेंसी के मालिक और इसमें शामिल उनके सभी स्थानीय सहयोगियों के खिलाफ सख्त विधिक व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

भू-कानून की प्रभावशीलता पर टिकी सबकी नजरें

स्थानीय कार्यकर्ताओं और जनता ने जिलाधिकारी के इस त्वरित हस्तक्षेप का पुरजोर स्वागत किया है। इसके साथ ही उन्होंने मांग उठाई है कि राज्य के अन्य जिलों में भी इसी तरह की सघन जांच अभियान चलाई जाए, जहां नए कानून के प्रभावी होने से ठीक पहले या बाद में बाहरी लोगों को बड़ी जमीनें बेची गई हैं।
प्रशासन का कहना है कि उत्तराखंड के भू-कानून का मूल उद्देश्य पहाड़ के निवासियों के हितों की रक्षा करना और सीमित कृषि भूमि के अंधाधुंध व्यावसायीकरण को रोकना है। अब पौड़ी की इस उच्चस्तरीय जांच के नतीजों पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसे इस बात की कसौटी माना जा रहा है कि सरकार का सख्त भू-कानून जमीन पर कितना प्रभावी ढंग से लागू हो पाता है।