भीषण वनाग्नि से मैठाणा गांव की कीवी बागवानी को भारी नुकसानचमोली खबर : भीषण वनाग्नि से मैठाणा गांव की कीवी बागवानी को भारी नुकसान ग्रामीणों ने रखी मुआवजे की मांग

चमोली खबर : भीषण वनाग्नि से मैठाणा गांव की कीवी बागवानी को भारी नुकसान ग्रामीणों ने रखी मुआवजे की मांग

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नंदप्रयाग : आजकल उत्तराखंड वनाग्नि की आग में झुलस रहा है। अब हालात ये हो गए हैं कि आग जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों में पहुँच कर लोगों की खेती और बागवानी को भी अपनी चपेट में लेने लगी है। वृहस्पतिवार को चमोली जिले के दशोली ब्लॉक के मैठाणा गांव के जंगलों में लगी आग फैलकर क्षेत्र में चर्चा बनी कीवी की बागवानी तक पहुँच गई जिससे काफी संख्या में कीवी की पौध और अन्य वनस्पतियों को नुकसान पहुंचा है। स्थानीय काश्तकार इससे सदमे में हैं।

जानकारी के अनुसार बुधवार रात को गांव के जंगल में आग लग गई थी जिसे स्थानीय ग्रामीण वन विभाग के कर्मचारियों के साथ जान जोखिम में डालकर बुझाने में प्रयासरत थे लेकिन वृहस्पतिवार को अचानक चली तेज हवाओं से आग ने अपना रुख बदलकर गांव की तरफ कर लिया जिससे गांव में तैयार कीवी की बागवानी इसकी चपेट में आ गई। जिसकी वजह से कुछ ड्रिप इरीगेशन की पाइप लाइन एवं कीवी की पौध के साथ-साथ जियो वाटर टंकी के ऊपर का कवर भी जल गया है। इस अचानक हुई घटना से स्थानीय काश्तकारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हमने अपनी पारंपरिक खेती से हटकर गांव में कीवी की पौध लगा बंजर खेतों को हराभरा करने का जो प्रयोग किया है उस पर आग की मार से हमें आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है। हमारा प्रशासन और वन विभाग से अनुरोध है कि वे नुकसान का आंकलन करे और प्रभावित काश्तकारों के आर्थिक नुकसान की भरपाई करे।
ज्ञातव्य हो कि स्थानीय 20-22 काश्तकारों की सामूहिक 50 नाली जमीन पर मॉर्डन विलेज योजना के तहत 2 वर्ष पूर्व उद्यान विभाग के सहयोग से इस कीवी की बागवानी को एक मॉडल के रूप में तैयार किया गया था।

इस कीवी बागवानी मॉडल के नीव के एक स्तंभ मुकेश सती इस घटना से काफी आहत हैं। उन्होंने जिला प्रशासन चमोली एवं वन विभाग से अनुरोध किया कि घटना से हुए नुकसान का आंकलन कर काश्तकारों के नुकसान की भरपाई की जाए ताकि उनका मनोबल न टूटे और वे बागवानी क्षेत्र में उत्तम कार्य कर प्रदेश की उन्नति में अपना सर्वोत्तम योगदान देते रहें। साथ ही उन्होंने उत्तराखंड सरकार और भारत सरकार से विनम्र आग्रह किया है कि उत्तराखंड के किसी भी गांव में इस तरह के प्रोजेक्ट में काश्तकारों की समस्याओं को मद्येनजर रखते हुए त्वरित कार्रवाही के साथ ही उचित समाधान किये जाए, ताकि जो लोग शहरों की नौकरियां छोड़ रिवर्स पलायन कर गांवों में रोजगार तलाश रहे हैं वो अपने मिशन में कामयाब हो सकें जिससे वीरान गांवों में फिर से हरियाली और खुशहाली लौट सके।

सती जी ने अपनी जान को जोखिम में डालकर इस भयानक आग को बुझाने के लिए वन विभाग के कर्मचारियों के साथ ही मैठाणा गांव के चंद्र मोलेश्वर सती, महेंद्र सती व उनकी पत्नी, पेड़ वाले गुरूजी, अंजलि डिमरी, पूर्व प्रधान शिव डिमरी आदि का आभार व्यक्त किया।

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