दिल्ली एनसीआर में ग्रीष्मकालीन गढ़वाली कुमाउनी एवं जौनसारी कक्षाओं का हुआ शुभारंभदिल्ली एनसीआर में ग्रीष्मकालीन गढ़वाली कुमाउनी एवं जौनसारी कक्षाओं का हुआ शुभारंभ, रामपार्क विस्तार लोनी सेंटर में प्रथम दिवस 39 बच्चों की रही सहभागिता

दिल्ली एनसीआर में ग्रीष्मकालीन गढ़वाली कुमाउनी एवं जौनसारी कक्षाओं का हुआ शुभारंभ, रामपार्क विस्तार लोनी सेंटर में प्रथम दिवस 39 बच्चों की रही सहभागिता

नई दिल्ली : उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली, डीपीएमआई इंस्टिट्यूट के सहयोग से विगत वर्ष 2016 से दिल्ली एनसीआर में अपनी मातृभाषा की ग्रीष्मकालीन कक्षाओं का संचालन करते आ रहा है। उनकी इस मुहीम में समाज का भरपूर सहयोग मिल रहा है और प्रतिवर्ष कक्षाओं के सेंटरों में इजाफा हो रहा है। इस बार 50 से अधिक सेंटरों में ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाओं का शुभारंभ रविवार 24 मई 2026 से हो चुका है।

इसी कड़ी में उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्रातृ समिति, रामपार्क विस्तार, लोनी, गाज़ियाबाद के सेंटर द्वारा गढ़वाली, कुमाउनी एवं जौनसारी ग्रीष्मकालीन शिक्षण कक्षाओं का शुभारंभ रविवार, 24 मई 2026 को A-35, दुर्गा मंदिर, अलकनंदा कॉलोनी, इलायचीपुर में अत्यंत हर्षोल्लास, सांस्कृतिक गरिमा एवं पारिवारिक वातावरण के साथ सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत विद्या की देवी माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई। इस दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत लोकगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ एवं पारंपरिक अभिव्यक्तियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। प्रथम दिवस 39 बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने मातृभाषा एवं लोकसंस्कृति के प्रति समाज में बढ़ती जागरूकता एवं आत्मीयता को दर्शाया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि अपनी मातृभाषा, लोकसंस्कृति एवं संस्कारों का संरक्षण एवं संवर्धन हम सभी की नैतिक एवं सामाजिक जिम्मेदारी है।

उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्रातृ समिति, रामपार्क विस्तार, लोनी के अध्यक्ष जयेन्द्र नेगी ने कहा कि नई पीढ़ी को गढ़वाली, कुमाउनी एवं जौनसारी भाषाओं से जोड़ने का उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय पहल है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मानित श्री मुरलीधर पाठक जी उपस्थित रहे। वहीं विशिष्ट अतिथियों के रूप में श्री राजेन्द्र सिंह रावत, श्री शंकर सिंह बिष्ट, श्री संतोष चौहान, श्री मोहन सिंह बिष्ट, श्री मोहन सिंह मनराल, श्री विकास रावत, श्री प्रदीप सिंह गौसाई एवं श्री महेंद्र सिंह गौसाई सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने इस सांस्कृतिक एवं शैक्षिक पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे समाज हित में अत्यंत सराहनीय प्रयास बताया।उत्तरांचल सांस्कृतिक भ्रातृ समिति के अध्यक्ष एवं वर्तमान में केन्द्र के मीडिया प्रभारी श्री जयेंद्र नेगी ने सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं, अभिभावकों एवं सहयोगियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि समाज के सामूहिक सहयोग एवं सहभागिता से यह सांस्कृतिक अभियान निरंतर नई ऊँचाइयों तक पहुँचेगा। उन्होंने केन्द्र प्रमुख श्रीमती मंजू उनियाल, श्रीमती पुष्पा सती, सह-मीडिया प्रभारी श्रीमती संगीता भट्ट एवं सभी बच्चों के समर्पण, अनुशासन एवं उत्साह की विशेष सराहना की।

कार्यक्रम के दौरान लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली के संरक्षक एवं डीपीएमआई के चेयरमैन आदरणीय डा. विनोद बच्छेती जी के योगदान को भी विशेष रूप से स्मरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उनके सतत प्रयासों एवं मार्गदर्शन से उत्तराखण्ड की लोकभाषाएँ आज देश-विदेश तक अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रही हैं।

अंत में समाज के सभी सम्मानित लोगों से अधिक से अधिक संख्या में इन शिक्षण कक्षाओं से जुड़कर अपनी मातृभाषा, संस्कृति एवं लोकपरम्पराओं को सशक्त एवं जीवंत बनाए रखने का आह्वान किया गया।

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