नारायणबगड़ अस्पताल में दर्दनाक हादसा दीवार गिरने से चिकित्सा प्रभारी डॉ. नवीन चंद्र डिमरी की मौत
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!कर्णप्रयाग : उत्तराखंड के चमोली जनपद के नारायणबगड़ से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ शनिवार दोपहर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) परिसर की सुरक्षा दीवार अचानक ढह गई। इस हादसे की चपेट में आने से अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. नवीन चंद्र डिमरी की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र और स्वास्थ्य महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है।
मरम्मत कार्य के निरीक्षण के दौरान हुआ हादसा
मिली जानकारी के अनुसार, बीते 25 जून को हुई भारी मूसलाधार बारिश और मलबे के कारण अस्पताल परिसर की सुरक्षा बाउंड्रीवाल काफी जर्जर और संवेदनशील हो गई थी। शनिवार को इसी क्षतिग्रस्त दीवार की मरम्मत का कार्य चल रहा था। दोपहर के समय चिकित्सा प्रभारी डॉ. नवीन चंद्र डिमरी खुद मौके पर मौजूद रहकर कार्य का जायजा ले रहे थे। इसी दौरान खोखली हो चुकी भारी-भरकम दीवार अचानक भरभराकर उनके ऊपर गिर गई, जिससे वे मलबे के नीचे पूरी तरह दब गए।
रास्ते में तोड़ा दम, क्षेत्र में पसरा सन्नाटा
दीवार गिरते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई। स्वास्थ्य कर्मियों, स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। भारी मशक्कत के बाद डॉ. डिमरी को मलबे से बाहर निकाला गया। गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया, लेकिन चोटें इतनी जानलेवा थीं कि रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। मिलनसार और कर्तव्यनिष्ठ डॉक्टर के इस तरह आकस्मिक निधन से स्थानीय जनता गहरे सदमे में है।
कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में पहचान (डॉक्टर प्रोफाइल)
आवासीय भवन के पीछे हुआ हादसा: स्थानीय लोगों के अनुसार डॉ. नवीन चंद्र डिमरी बेहद कर्तव्यनिष्ठ और सजग चिकित्सा प्रभारी थे। वे शनिवार को अस्पताल के मुख्य कार्य के साथ-साथ परिसर के समीप बने आवासीय भवन के ठीक पीछे हो रहे सुरक्षा दीवार के कार्य का भी बारीकी से निरीक्षण कर रहे थे, ताकि वहां रहने वाले अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को कोई खतरा न हो।क्षेत्र में शोक: उनकी इस सक्रियता और क्षेत्र के लोगों के प्रति मिलनसार व्यवहार के कारण ही नारायणबगड़ के स्थानीय व्यापारी और आम जनता उनके बेहद करीब थी, यही वजह है कि हादसे के तुरंत बाद पूरी बाजार के लोग उन्हें बचाने के लिए मलबे की तरफ दौड़ पड़े थे।

