वीरोंखाल (पौड़ी गढ़वाल) : उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि सुधार, बंजर भूमि को पुनर्जीवित करने और रिवर्स पलायन की दिशा में आज एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया गया। विकास खंड वीरोंखाल ब्लॉक मुख्यालय में स्वैच्छिक चकबंदी को लेकर एक दिवसीय भव्य जागरूकता सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। इस सेमिनार में क्षेत्र के सैकड़ों जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कृषकों ने हिस्सा लिया और पहाड़ के सुनहरे भविष्य के लिए चकबंदी को अपनाने का संकल्प लिया।

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वरिष्ठ नेतृत्व के संयोजकत्व में हुआ आयोजन

इस महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन HKP वीरोंखाल ब्लॉक अध्यक्ष श्री अर्जुन सिंह रावत एवं पौड़ी जिला अध्यक्ष श्री दिनेश सिंह रावत जी के कुशल संयोजकत्व में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध राज्य आंदोलनकारी श्री रवींद्र सिंह बिष्ट जी द्वारा की गई। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों और किसानों को बिखरी हुई जोतों (जमीन) को एक जगह इकट्ठा करने यानी चकबंदी के फायदों के प्रति जागरूक करना और इससे जुड़े विभिन्न भ्रमों को दूर करना था।

चकबंदी के प्रणेता श्री केवलानंद तिवारी ने दी विस्तृत जानकारी

सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे चकबंदी के प्रणेता श्री केवलानंद तिवारी जी ने अपने संबोधन से उपस्थित जनसमूह को बेहद प्रभावित किया। उन्होंने चकबंदी अधिनियम 2016/2020 के कानूनी प्रावधानों को बेहद सरल और व्यावहारिक भाषा में समझाया।

श्री तिवारी ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के पहाड़ों में खेती के पिछड़ने और जंगली जानवरों के आतंक का एक बड़ा कारण जमीनों का छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखरा होना है। यदि किसान स्वैच्छिक चकबंदी के माध्यम से अपने पृथक (अलग-अलग) चकों को एक स्थान पर एकत्रित कर लेते हैं, तो न सिर्फ खेती की लागत कम होगी बल्कि आधुनिक तकनीकों और फेंसिंग का लाभ भी आसानी से लिया जा सकेगा। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न ग्राम प्रधानों और जनप्रतिनिधियों के मन में उठ रहे हर सवाल और शंका का बेहद तार्किक ढंग से समाधान किया।

सशक्त भू-कानून लागू करने पर बनी सर्वसम्मति

इस ऐतिहासिक सेमिनार का सबसे प्रमुख और नीतिगत बिंदु उत्तराखंड में जमीनों के संरक्षण को लेकर रहा। सेमिनार में मंच से लेकर सदन तक सभी वक्ताओं ने एक स्वर में मांग उठाई कि राज्य में बड़े पैमाने पर चकबंदी प्रक्रिया शुरू करने से पहले एक सशक्त और कड़ा भू-कानून लागू किया जाना अत्यंत आवश्यक है। वक्ताओं का तर्क था कि मजबूत भू-कानून होने से पहाड़ की अस्मिता और स्थानीय लोगों के भूमि अधिकारों की रक्षा होगी, जिसके बाद चकबंदी के परिणाम और अधिक सुरक्षित व लाभकारी होंगे। इस प्रस्ताव पर पूरे पंडाल में उपस्थित जनता ने ध्वनिमत से अपनी पूर्ण सहमति जताई।

ऑन द स्पॉट 45 किसानों ने किया आवेदन

जागरूकता का असर कार्यक्रम के दौरान ही धरातल पर देखने को मिला। मुख्य वक्ता और संयोजकों की बातों से प्रेरित होकर मौके पर ही लगभग 45 किसानों ने स्वैच्छिक चकबंदी के लिए अपने ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदन फॉर्म भरे। किसानों के इस भारी उत्साह को देखते हुए संगठन ने एक बड़ा निर्णय लिया। अब प्रदेश के प्रत्येक जिले और ब्लॉक स्तर पर जागरूक प्रबुद्ध जनों को मिलाकर एक विशेष ‘चकबंदी समिति’ का गठन किया जाएगा, ताकि इस अभियान को युद्धस्तर पर आगे बढ़ाया जा सके और गांवों में जाकर लोगों की मदद की जा सके।

पलायन पर लगेगी रोक, बंजर खेत होंगे आबाद

नेताओं और विचारकों ने कहा कि इस ऐतिहासिक पहल से पहाड़ के जो खेत सालों से वीरान और बंजर पड़े हैं, वे फिर से लहलहा उठेंगे। सामूहिक और संगठित खेती से युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे न केवल वर्तमान पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी, बल्कि शहरों की तरफ जा चुके प्रवासियों के लिए ‘रिवर्स पलायन’ का मार्ग भी हमेशा के लिए प्रशस्त होगा।

सैकड़ों जनप्रतिनिधियों की रही गरिमामयी उपस्थिति

इस ऐतिहासिक अवसर पर HKP प्रदेश महासचिव डॉ. दिनेश सिंह बिष्ट, कोट ब्लॉक अध्यक्ष श्री रमेश सिंह बेलवाल, यमकेश्वर विधानसभा प्रत्याशी श्री सतेंद्र सिंह रावत, देहरादून जिला महासचिव श्री मन जुयाल, श्री कुलदीप सिंह बिष्ट, श्री बालम सिंह नेगी, कर्नल यशपाल सिंह नेगी, प्रधान संघ अध्यक्ष वीरोंखाल श्री संदीप सिंह गुसाईं, ज्येष्ठ प्रमुख वीरोंखाल श्री कुलदीप सिंह नेगी, श्री भूपेंद्र सिंह बगलाणा (उपाध्यक्ष चकबंदी मंच), डॉ. प्रेम बहुखंडी, श्री देवेंद्र बुढ़ाкоटी, श्री श्रवण कुमार रावत व श्री स्वरूप सिंह रावत सहित भारी संख्या में क्षेत्रों के प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।

सेमिनार के अंत में सफल और प्रभावी संचालन श्री अर्जुन सिंह रावतश्री दिनेश सिंह रावत जी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिन्होंने इस मुहिम को घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।