जंगली जानवरों द्वारा पालतू पशुओं को नुकसान पहुंचाने पर भी

मिलेगा मुआवजा वन विभाग ने अलग-अलग पशुओं के लिए

निर्धारित की अलग-अलग दरें


चंद्र सिंह रावत “स्वतंत्र”




प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग ने मानव वन्यजीव संघर्ष में घायल, अपंग या मौत होने पर मुआवजे के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि पीसीसीएफ द्वारा सभी डीएफओ और पार्क निदेशकों को इसका पालन करने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। वन विभाग द्वारा न‌ई गाइडलाइन में कहा गया है कि सांप, हाथी, गुलदार, तेंदुआ, सुअर, भालू आदि जानवरों द्वारा यदि किसी व्यक्ति पर हमला किया जाता है तो उस व्यक्ति के मृत्यु, घायल या विकलांग होने पर उसके परिजनों को वन विभाग द्वारा जारी न‌ई मुआवजा दरों के अनुसार साधारण रूप से घायल होने पर 15 हजार, गंभीर रूप से घायल होने पर 50 हजार, आंशिक रूप से विकलांग होने पर जहां 1 लाख का मुआवजा प्रभावित व्यक्तियों के परिजनों को प्रदान किया जाएगा वहीं व्यक्ति के पूर्ण रूप से विकलांग होने पर 2 लाख एवं मौत होने पर 4 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। इसी तरह पशुओं की क्षति होने पर जहां गाय, भैंस के लिए 30 हजार, घोड़ा, खच्चर के लिए 40 हजार, बैल के लिए 25 हजार, बछड़े के लिए 16 हजार एवं बकरी,भेड़ के लिए 3 हजार रुपए की मुआवजा राशि निर्धारित की गई है।

गुलदार/बाघ के हमला करने पर नियम




सामान्य परिस्थितियों में गुलदार के आदमखोर होने पर प्रभागीय वनाधिकारी की ओर से मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को रिपोर्ट भेजी जाती है। इसके बाद अनुमति मिलने पर डीएफओ की ओर से गुलदार को मारने के निर्देश दिए जाते हैं। आपको बता दें यह भी सुनिश्चित किया जाता है गुलदार को पिंजड़े में पकड़ कर उसे घने वनों में छोड़ा जा सकता है अथवा नहीं? मारने के आदेश तभी दिए जाते हैं जब यह सुनिश्चित कर लिया जाता है कि अमुक में सुधार हो सकता है अथवा नहीं।

वन्य जीव संरक्षण करना हमारी भी ज़िम्मेदारी

आज वन्य जीव संरक्षण करना हमारी भी ज़िम्मेदारी है और उन्हे भी जीवन जीने का अधिकार है, इसलिए सरकार द्वारा वन्य प्राणियों का आखेट या शिकार करना प्रतिषेध किया गया है। कोई भी व्यक्ति वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 अनुसूची 1, अनुसूची 2, अनुसूची 3 और अनुसूची 4 में विनिर्दिष्ट किसी वन्य प्राणी का, धारा 1 और धारा 2 के अधीन यथा उपबंधित के सिवाय शिकार नहीं करेगा।

वन्य प्राणियों के आखेट की अनुज्ञा

यदि मुख्य वन्य जीव संरक्षक का यह समाधान हो जाता है कि अनुसूची में विनिर्दिष्ट कोई वन्य प्राणी मानव जीवन के लिए खतरनाक हो गया है या ऐसा नि:शक्‍त या रोगी है जो ठीक नहीं हो सकता है, तो वह लिखित आदेश द्वारा और उसके लिए कारण कथित करते हुए किसी व्यक्ति को ऐसे प्राणी का आखेट करने या उसका आखेट करवाने की अनुज्ञा दे सकेगा।

किसी वन्य प्राणी को मारने का आदेश




किसी वन्य प्राणी को मारने का आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक कि मुख्य वन्य जीव संरक्षक का यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसा प्राणी पकड़ा नहीं जा सकता, प्रशान्त नहीं किया जा सकता या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता और ऐसे पकड़े गए किसी भी प्राणी को तब तक बन्दी बनाकर नहीं रखा जाएगा जब तक कि मुख्य वन्य जीव संरक्षक का यह समाधान नहीं हो जाता है कि ऐसे प्राणी को वन में पुनर्वासित नहीं किया जा सकता 

प्रतिरक्षा में किसी वन्य प्राणी मारना अपराध नहीं




अपनी या किसी अन्य व्यक्ति की प्रतिरक्षा में किसी वन्य प्राणी को सदभावपूर्वक मारना या घायल करना अपराध नहीं होगा,  परन्तु इस उपधारा की कोई बात ऐसे किसी व्यक्ति को विमुक्त नहीं करेगी, जो उस समय जब ऐसी प्रतिरक्षा आवश्यक हो गई है, इस अधिनियम के या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के किसी उपबन्ध के उल्लंघन में कोई कार्य कर रहा था।

उक्त नियम वन्य जीव संगक्षण में उल्लिखित हैं।



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