शास्त्रीय गायिका मीरा गैरोला





नई दिल्ली :
गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान दिल्ली ने शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में 
शास्त्रीय गायिका मीरा गैरोला के योगदान से भावी पीढ़ी को रूबरू कराने के लिए उनकी पुण्य तिथि पर मयूर पब्लिक स्कूल के सभागार में गीत-संगीत और भजनों का मनभावन आयोजन किया। सर्वप्रथम द्वीप प्रज्वलित कर ममता गोनियाल के निर्देशन में कथक नृत्यांगना निकिता थपलियाल और यशवी शर्मा के मनमोहक कत्थक नृत्य के साथ गणेश वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई।  

मीरा को याद करते हुए गढ़वाल अध्ययन प्रतिष्ठान दिल्ली के अध्यक्ष रमेश चंद्र घिल्डियाल ने कहा कि ग्वालियर संगीत घराने से ताल्लुक रखने वाली शास्त्रीय गायिका मीरा गैरोला गायिका होने के साथ साथ एक उच्चकोटि की लेखिका और विदुषी थी। अपने जीवन काल में उन्होंने दो उत्कृष्ट पुस्तकों ‘एक कलाकार की दास्तान’ और ‘मीरा’ लिखकर हिन्दी साहित्य जगत में अपना योगदान दिया।

गढ़वाली, कुमाऊनी और जौनसारी अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष एम एस रावत ने कहा कि मीरा गैरोला अपने छोटे से जीवन काल में शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में बहुत बड़ा काम करके गई हैं। 





इस अवसर पर मीरा गैरोला के पति सुरेंद्र गैरोला ने उत्तराखंड संस्कृत अकादमी और नंदा देवी राजजात के लिए मीरा गैरोला की संगीत सेवाओं से जुड़े संस्मरण साझा किए। प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीत गायिका मधु बेरिया शाह, कृपाल सिंह रावत, अंकित भंडारी, नीमा गुसाईं, सीमा भंडारी और तबलावादक सतीश मिश्रा ने अपनी संगीत प्रस्तुतियों के माध्यम से गायिका मीरा गैरोला को याद किया। वहीं ऑडियो मैसेज के माध्यम से शास्त्रीय संगीत की उभरती गायिका संस्कृति गैरोला ने प्रस्तुति देकर अपनी मां मीरा गैरोला के गायन की यादें फिर से ताजा कर दी। वहीं मीरा गैरोला के बड़े भाई मनोबल मैठाणी ने तबले पर प्रस्तुति देकर अपनी छोटी बहन को संगीतमय श्रद्धांजलि दी। 





कार्यक्रम का सफल संयोजन और संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार प्रदीप कुमार वेदवाल ने किया। इस अवसर पर डाॅक्टर राजेश्वरी कापड़ी, उप निदेशक शिक्षा दिल्ली सरकार, ब्लॉगर पूजा गुसाईं, उषा ममगाईं, कुसुम कंडवाल भट्ट, हिमालय परिवार के उदय शर्मा, लेखक एस पी गौड़, शर्मिला दत्त अमोला, पत्रकार सी एम पपनै, गढ़वाली कवि भगवती प्रसाद जुयाल ‘गढ़देशी’,  बिहारी लाल जालंधरी, पृथ्वी सिंह केदारखण्डी, रंगकर्मी बृजमोहन शर्मा वेदवाल, रंगकर्मी मनोज चंदोला, सुशील बुडाकोटी शैलांचली, गोपाल नेगी, महेन्द्र गुसाईं, अपूर्व मैठाणी, नवीन भट्ट, अनिल पंत, गीता नेगी, कुसुम बिष्ट, नीरज रावत, देवेन्द्र सजवाण, सुरेंद्र सिंह तडियाल और दर्शन सिंह रावत आदि उपस्थित थे।




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