उत्तराखंड : गुलदार के लगातार बढ़ते हमलों से गुस्साए ग्रामीणों ने जिलाधिकारी पौड़ी और वन विभाग के कर्मचारियों का किया घेराव





पौड़ी
: गुलदार के लगातार बढ़ रहे आतंक और प्रशासन के ढुलमुल रवैये से पौड़ी जिले के ग्रामीण काफी आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से इस बावत कोई उचित कार्यवाही देखने को नहीं मिल रही है। 

गुरुवार को भी गुलदार ने गजल्ड गांव के एक व्यक्ति को अपना निवाला बनाया, जिसके बाद ग्रामीणों का सब्र टूट गया और उन्होंने पौड़ी मुख्यालय के नजदीक गजल्ड गांव पहुंचे वन विभाग के कर्मचारियों को कैद कर जिलाधिकारी का घेराव किया। 

गुलदार को शूट करने की रखी मांग 

ग्रामीणों की मांग है कि गुलदार के लगातार हो रहे हमलों को देखते हुए उसे तत्काल  शूट करने की अनुमति दी जाए, ताकि लोगों की जान बच सके।  ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं और कई बार इसकी सूचना विभाग को दी जा चुकी है, लेकिन विभाग ने ढुलमुल रवैया ही अपनाया, कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम उठाए जाते तो आज यह दुखद घटना नहीं होती। 

वन विभाग के कर्मचारियों को ग्रामीणों ने किया कैद 




जानकारी के मुताबिक गजल्ट गांव निवासी राजेंद्र नौटियाल रोजाना की तरह मंदिर में पूजा-अर्चना करने गए थे। वहीं से लौटते समय जंगल के रास्ते पर घात लगाए बैठे गुलदार ने उन पर अचानक हमला कर दिया। गुलदार के हमले की तीव्रता इतनी भयानक थी कि राजेंद्र ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हमले की जानकारी मिलते ही पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पसर गया। राजेंद्र नौटियाल की मौत पर गांव में पहुंचे वन विभाग के कर्मचारियों को ग्रामीणों को घेर लिया और भवन के एक कमरे में बंद कर दिया। 


जिलाधिकारी का महिलाओं ने किया घेराव 

घटना की जानकारी लेने जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति एस भदौरिया जब गजल्ड गांव पहुंची तो उन्हें भी ग्रामीण महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ा। महिलाएं उनकी कोई बात सुनने को तैयार नहीं थी उनकी बस एक ही मांग थी कि हमें भी अपनी रक्षा का अधिकार है इसलिए गुलदार को शूट करने के आदेश दिए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा केवल मुआवजे की बात कह कर हर बार एक्शन लेने पर टाल मटोल किया जाता रहा है जो अब नहीं चलेगा। महिलाओं ने जिलाधिकारी के वाहन को चारों तरफ से घेर लिया और उन्हें गाड़ी में नहीं बैठने दिया। वन अधिकारियों और जिलाधिकारी द्वारा ग्रामीणों को समझाने का काफी प्रयास किया गया लेकिन ग्रामीणों खाकर महिलाओं का एक ही कहना था कि गुलदारों को जब तक मारने के आदेश नहीं दिए जाते और शूटर यहां नहीं पहुंचता तब तक हम यहां से किसी को नहीं जाने देंगे। आखिर काफी जद्दोजहत और जिलाधिकारी द्वारा ठोस आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को जाने दिया। 




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