राज्य आंदोलनकारी चिन्हीकरण की उठाई मांगउत्तराखंड : चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति ने चिह्नीकरण में तेजी लाने और 2008 के मानकों को लागू करने की रखी मांग

उत्तराखंड : चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति ने चिह्नीकरण में तेजी लाने और 2008 के मानकों को लागू करने की रखी मांग

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नई दिल्ली : उत्तराखंड चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति, दिल्ली प्रदेश ने एक बैठक में सरकार से चिह्नीकरण के मानकों में अस्पष्टता दूर करने और 2008 के पुराने मानकों को लागू करने की मांग की है।

समिति के अध्यक्ष मनमोहन सिंह ने बताया कि आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण के मामले में 9 नवम्बर 2025 का शासनादेश कुछ जिलों, खासकर रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में पहुंचा ही नहीं है। वहां चिह्नीकरण का कार्य 2017 के मानकों के मुताबिक सिर्फ ‘जेल’ और ‘घायल’ को आधार बनाकर किया जा रहा है। जबकि नए शासनादेश में ‘डीएम के विवेक व अन्य अभिलेख’ वाले मानक का उल्लेख है।

श्री मनमोहन ने उत्तराखंड आंदोलनकारी सम्मान परिषद के उपाध्यक्ष माननीय मंत्री सुभाष बड़थ्वाल से हुई बातचीत का हवाला देकर बताया कि मंत्री महोदय अखबार कटिंग को भी मानक का आधार बनाए जाने के पक्षधर हैं, जैसा कि 2008 के शासनादेश में था। बकौल मनमोहन, श्री बड़थ्वाल चाहते हैं कि चिह्नीकरण की प्रक्रिया तेज और व्यापक हो। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने चिह्नीकरण की प्रक्रिया 24 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी है।

बैठक में चिह्नित राज्य आंदोलनकारी समिति, दिल्ली के पदाधिकारी संरक्षक अनिल पंत, रामेश्वर गोस्वामी, पंचम सिंह रावत, पुष्पा घुघत्याल, पदम सिंह बिष्ट, नरेंद्र सिंह बिष्ट, शिव सिंह रावत, रविंद्र भरतवाल, एचपी बलूनी, विनोद पंत और व्योमेश जुगरान शामिल थे।