आदर्श संस्कृत ग्राम डिम्मर चमोली के प्रथम वार्षिकोत्सव में संस्कृत में भाषण देती उत्तराखंड की महिलाएं और उपस्थित अतिथिउत्तराखंड : आदर्श संस्कृत ग्राम डिम्मर का प्रथम वार्षिकोत्सव, जन-जन की भाषा बनी देववाणी, महिलाओं ने संस्कृत भाषण से बांधा समां
  • आदर्श संस्कृत ग्राम डिम्मर के वार्षिकोत्सव विशिष्ट गणमान्यों की गरिमामयी उपस्थिति
  • संस्कृत के संरक्षण में आदर्श संस्कृत ग्राम डिम्मर की अनुकरणीय पहल
  • आधुनिकता और परंपरा का संगम किवाड़ को सही से एडजस्ट करने की सीख
  • महिलाओं की संस्कृत भाषण प्रतियोगिता रही आकर्षण का केंद्र

कर्णप्रयाग : उत्तराखंड के चमोली (Chamoli) जिले में स्थित आदर्श संस्कृत ग्राम डिम्मर ने अपनी सांस्कृतिक और भाषाई यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव पार कर लिया है। ग्राम को आदर्श संस्कृत ग्राम का गौरव प्राप्त हुए एक वर्ष पूर्ण होने के शुभ अवसर पर गाँव में एक भव्य साप्ताहिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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इस वार्षिकोत्सव ने जहाँ एक ओर देववाणी संस्कृत की समृद्ध परंपरा को जीवंत किया, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड की लोकसंस्कृति की सुंदर झलक भी प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री समीर मिश्रा उपस्थित रहे, जिन्होंने दीप प्रज्वलन कर समारोह का विधिवत शुभारंभ किया।

आदर्श संस्कृत ग्राम डिम्मर के वार्षिकोत्सव विशिष्ट गणमान्यों की गरिमामयी उपस्थिति

इस भव्य समारोह को सफल बनाने में आदर्श संस्कृत ग्राम डिम्मर के प्रबुद्ध जनों और विशिष्ट नागरिकों ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में संस्कृत शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले गाँव के प्रमुख व्यक्तित्व श्री सतीश डिमरी, श्री उमेश डिमरी, श्री राकेश डिमरी, श्री मनीष डिमरी और श्री भुवन डिमरी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर उपस्थित रहे। इसके साथ ही गाँव के वयोवृद्ध विद्वानों, मातृशक्ति और युवा वर्ग ने एक साथ मिलकर मुख्य अतिथि का पारंपरिक वाद्य यंत्रों और पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत किया।

संस्कृत के संरक्षण में आदर्श संस्कृत ग्राम डिम्मर की अनुकरणीय पहल

आज के आधुनिक युग में जहाँ पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं आदर्श संस्कृत ग्राम डिम्मर ने अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। पिछले एक वर्ष में इस गाँव ने संस्कृत को केवल पूजा-पाठ की भाषा न रखकर, इसे रोज़मर्रा के व्यावहारिक जीवन में ढालने का भगीरथ प्रयास किया है। वार्षिकोत्सव के दौरान आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रमों में गाँव के बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक का संस्कृत के प्रति अगाध प्रेम देखने को मिला। पूरा गाँव वैदिक मंत्रोच्चार और संस्कृत के श्लोकों से गुंजायमान रहा।

आधुनिकता और परंपरा का संगम किवाड़ को सही से एडजस्ट करने की सीख

इस भव्य आयोजन में शिक्षाविदों और वक्ताओं ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि यदि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखना है, तो हमें अपने घरों के ‘किवाड़‘ (दरवाजे) को सही से एडजस्ट करना होगा। यहाँ ‘किवाड़ एडजस्ट करने’ का गहरा आध्यात्मिक और सामाजिक अर्थ है—हमें अपने घर के दरवाजों को आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और प्रगति के लिए खुला तो रखना है, लेकिन उन्हें इस तरह एडजस्ट करना है कि हमारी सनातन संस्कृति, मर्यादा, और देववाणी संस्कृत के संस्कार घर से बाहर न जा पाएं।

वक्ताओं ने कहा कि डिम्मर ग्राम ने अपने किवाड़ को बहुत ही खूबसूरती से एडजस्ट किया है; यहाँ के लोग आधुनिक दुनिया के साथ कदम से कदम मिला रहे हैं, लेकिन अपनी प्राचीन भाषा और संस्कृति के किवाड़ को पूरी मजबूती से थामे हुए हैं।

महिलाओं की संस्कृत भाषण प्रतियोगिता रही आकर्षण का केंद्र

इस पूरे साप्ताहिक महोत्सव का सबसे सुंदर और प्रेरणादायी पहलू महिलाओं की सक्रिय भागीदारी रही। विशेष रूप से आयोजित संस्कृत भाषा की भाषण प्रतियोगिता में ग्रामीण महिलाओं ने जिस उत्साह, शुद्ध उच्चारण और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखी, उसने वहां उपस्थित हर व्यक्ति को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिलाओं ने न केवल संस्कृत के प्रति अपने अगाध ज्ञान का परिचय दिया, बल्कि यह भी साबित किया कि यदि मातृशक्ति ठान ले, तो वह किसी भी भाषा और संस्कृति को पुनर्जीवित कर सकती है। महिलाओं की यह प्रस्तुति अत्यंत सराहनीय और समाज के लिए एक महान प्रेरणा रही।

मुख्य अतिथि ने सराहा सामूहिक प्रयास

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि समीर मिश्रा ने कहा, “डिम्मर ग्राम द्वारा संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयास वास्तव में अद्भुत हैं। यह गाँव केवल उत्तराखंड के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए संस्कृत संरक्षण और संवर्धन की एक अनुकरणीय मिसाल बन चुका है।” उन्होंने ग्रामवासियों को प्रथम वर्षगांठ की बधाई देते हुए गाँव के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और सरकार की ओर से हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा

हमारी प्राचीन संस्कृति, लोक परंपरा और देववाणी संस्कृत का यह अनूठा संगम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करेगा। डिम्मर ग्राम ने यह दिखा दिया है कि सामूहिक इच्छाशक्ति से किसी भी ऐतिहासिक धरोहर को सहेजा जा सकता है। कार्यक्रम का समापन पारंपरिक सांस्कृतिक नृत्यों और राष्ट्र कल्याण की मंगलकामना के साथ हुआ। आदर्श संस्कृत ग्राम डिम्मर को इस गौरवमयी यात्रा का प्रथम वर्ष पूर्ण होने पर संपूर्ण देवभूमि की ओर से हार्दिक बधाई।