मां नंदा की बड़ी जातचमोली : मां नंदा की बड़ी जात 5 सितंबर से, 484 गांवों के श्रद्धालु होंगे शामिल, राजनीति से दूर रखने की अपील

मां नंदा की बड़ी जात 2026: 5 सितंबर से शुरू होगी ऐतिहासिक यात्रा 484 गांवों के श्रद्धालु होंगे शामिल

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  • मां नंदा की बड़ी जात 2026: ऐतिहासिक यात्रा की तारीखें
  • 484 गांवों के श्रद्धालु और भव्य आयोजन
  • दुर्गम पड़ावों पर सुरक्षा और अधिकारियों को ज्ञापन
  • पड़ाव समितियां गठित और स्थानीय जिम्मेदारियां
  • धार्मिक आस्था के महापर्व पर न हो राजनीति

गोपेश्वर: उत्तराखंड की लोक संस्कृति, अटूट परंपरा और अगाध आस्था का प्रतीक मां नंदा की बड़ी जात इस वर्ष 5 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित की जाएगी। चमोली जिले के प्रसिद्ध सिद्धपीठ कुरुड़ से शुरू होने वाली इस ऐतिहासिक और दिव्य यात्रा की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं।

इस महापर्व को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए मां नंदा की बड़ी जात आयोजन समिति ने पूरी तरह से कमर कस ली है। कुरुड़ स्थित मां नंदा के मुख्य मंदिर परिसर में रंग-रोगन, साज-सज्जा और मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

484 गांवों के श्रद्धालु और भव्य आयोजन

बड़ी जात समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत (सेनि.) ने बताया कि इस बार होने वाली मां नंदा की बड़ी जातमें जनपद के 484 गांवों के हजारों श्रद्धालु अपनी आराध्य देवी के दर्शन के लिए शामिल होंगे। यात्रा के दौरान मां नंदा की पवित्र डोली कुरुड़ से प्रस्थान करेगी और विभिन्न पड़ावों से होते हुए आगे बढ़ेगी।

समिति ने जिला प्रशासन, राज्य शासन और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के प्रतिनिधियों से इस महापर्व में शामिल होने का विशेष आग्रह किया है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य स्तर से यात्रा के सफल संचालन हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने की मांग की गई है, जिससे उत्तराखंड के इस सांस्कृतिक वैभव को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान मिल सके।

दुर्गम पड़ावों पर सुरक्षा और अधिकारियों को ज्ञापन

मां नंदा की बड़ी जात यात्रा मार्ग के दुर्गम, संकरे और निर्जन पड़ावों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर समिति बेहद गंभीर है। यात्रा के दौरान मौसम की अनिश्चितता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पदाधिकारियों ने हाल ही में जिलाधिकारी (DM) को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा है।

इस ज्ञापन के माध्यम से समिति ने मांग की है कि निर्जन पड़ावों के रास्तों का सुधारीकरण कार्य तुरंत शुरू किया जाए। साथ ही, संवेदनशील रास्तों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना या आपातकालीन स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। प्रशासन से चिकित्सा और संचार सुविधाओं को भी दुरुस्त करने की अपील की गई है।

पड़ाव समितियां गठित और स्थानीय जिम्मेदारियां

अध्यक्ष कर्नल रावत ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि मां नंदा की बड़ी जात यात्रा सुचारू और शांतिपूर्ण रूप से चले, इसके लिए सभी विभिन्न पड़ावों पर स्थानीय स्तर पर उप-समितियों (पड़ाव समितियों) का गठन कर दिया गया है।

इन स्थानीय समितियों को यात्रियों के ठहरने, खान-पान और प्राथमिक चिकित्सा जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं के सहयोग से गठित ये समितियां चौबीसों घंटे श्रद्धालुओं की सेवा और मार्गदर्शन के लिए यात्रा मार्ग पर तैनात रहेंगी।

धार्मिक आस्था के महापर्व पर न हो राजनीति

गोपेश्वर में आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता के दौरान समिति के पदाधिकारियों ने दोटूक शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मां नंदा की बड़ी जात पूरी तरह से धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र है। इसलिए, इस पावन और पवित्र आयोजन को किसी भी राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए और न ही इसे राजनीतिक विषय बनाया जाना चाहिए। यह महापर्व सभी को आपस में जोड़ने का माध्यम है।

इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला, बड़ी जात समिति के सचिव अशोक गौड़, संदीप पंवार, रणजीत सिंह नेगी, महेंद्र सिंह राणा, बल्लभ प्रसाद थपलियाल, वीरेंद्र सिंह रावत, महावीर सिंह पंवार और गोविंद सिंह बजवाल सहित क्षेत्र के कई गणमान्य पदाधिकारी व सम्मानित सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे।