बीरोंखाल पौड़ी गढ़वाल में स्वैच्छिक चकबंदी बैठक 2026 में शामिल किसान और सामाजिक कार्यकर्ताबीरोंखाल: बिखरी कृषिभूमि को व्यक्तिगत खातों में समेटने के लिए आगे आए किसान, 45 भूमिधरों ने भरे आवेदन

पौड़ी : क्षेत्र पंचायत सभागार, बीरोंखाल, पौड़ी गढ़वाल में पर्वतीय क्षेत्रों के भूमिधरों की गोलखातों में बिखरी कृषिभूमि को स्वैच्छिक चकबंदी के माध्यम से उनके व्यक्तिगत खातों में एकत्रित कराने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!


इस बैठक में चकबंदी मंच उत्तराखंड के अध्यक्ष श्री केवला नन्द तेवाड़ी तथा उपाध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सिंह बगलाणा को सामाजिक कार्यकर्ताओं श्री अर्जुन सिंह रावत एवं श्री दिनेश रावत द्वारा विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। बैठक में क्षेत्र के सम्मानित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा बड़ी संख्या में किसान भाई-बहनों ने भाग लिया।


सभा को संबोधित करते हुए श्री तेवाड़ी ने स्वैच्छिक चकबंदी की प्रक्रिया पर बताया कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी कृषिभूमि को चकबंदी अधिनियम/नियमावली 2016/2020 के प्रावधानों के अंतर्गत बिना अनावश्यक आर्थिक बोझ के गोलखातों से निकालकर भूमिधरों के व्यक्तिगत खातों में व्यवस्थित कराने के लिए हजारों भूमिधरों द्वारा अपनी-अपनी तहसीलों में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन आवेदन किए जा चुके हैं।
इसी क्रम में राज्य सरकार द्वारा 1 जून 2026 से “स्वैच्छिक/आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति-2026” लागू की गई है।


श्री तेवाड़ी ने बताया कि जिन गांवों में बड़ी संख्या में भूमिधरों, विशेषकर 70–80 प्रतिशत या उससे अधिकों ने आवेदन किए हैं और ग्रामसभा प्रस्ताव भी पारित हो चुके हैं, वहां प्रत्येक आवेदक की खातावार कुल भूमि का विवरण उपलब्ध कराकर, आपसी सहमति से खेतों के अदल-बदल के माध्यम से उतनी ही भूमि को एकत्रित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।


इसी संबंध में 7 सितम्बर 2026 को चकबंदी मंच के शिष्टमंडल ने आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद, देहरादून से मुलाकात कर ऐसे गांवों में इस प्रक्रिया को धरातल पर प्रारम्भ कराने का अनुरोध किया है। मंच ने यह भी आग्रह किया है कि यदि किसी गांव में दो या दो से अधिक परिवार आपसी सहमति से एक-दो खेतों का भी अदल-बदल कर लेते हैं, तो ऐसी आंशिक पहल को भी मान्यता देते हुए आगे की प्रक्रिया प्रारम्भ की जाए।

श्री तेवाड़ी ने बीरोंखाल उपस्थित किसान भाई-बहनों से आग्रह किया कि चाहे शुरुआत छोटी हो, लेकिन होनी चाहिए। इसलिए भूमिधर इसे केवल एक सरकारी योजना के रूप में न देखें, बल्कि अपने गांव, अपनी जमीन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को व्यवस्थित करने का अवसर मानें।
इसी आह्वान का तत्काल सकारात्मक परिणाम भी सामने आया। बैठक के दौरान ही लगभग 45 भूमिधरों के ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन भरवाए गए। इन आवेदनों को संबंधित तहसील में प्रस्तुत कर उनकी प्राप्ति की रसीद लेने की जिम्मेदारी सामाजिक कार्यकर्ता श्री दिनेश रावत जी को दी गई।


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन गांवों में 60–70 प्रतिशत भूमिधरों के आवेदन अभी नहीं हो पाए हैं, वहां भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है। यदि दो या दो से अधिक परिवारों ने आपसी सहमति से एक-दो खेतों का अदल-बदल करके एक-दो नाली भूमि भी एकत्रित की है, तो वे तत्काल अपनी तहसील में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।


मंच का मानना है कि चकबंदी की शुरुआत एक-दो नाली से ही क्यों न हो, लेकिन शुरुआत होनी चाहिए। ऐसी छोटी-छोटी स्वैच्छिक पहलें आगे चलकर बड़े स्तर पर भूमि के व्यवस्थित उपयोग का आधार बन सकती हैं।


इसी उद्देश्य से दो या दो से अधिक परिवारों द्वारा आपसी सहमति से अदल-बदल किए गए खेतों को उनके वास्तविक मालिकों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराने हेतु एक नया आवेदन-पत्र भी भूमिधरों को उपलब्ध कराया गया।


इसके बाद प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया। इसमें चकबंदी मंच के अध्यक्ष श्री केवला नन्द तेवाड़ी जी तथा उपाध्यक्ष श्री भूपेन्द्र सिंह बगलाणा जी ने उपस्थित भूमिधरों द्वारा पूछे गए चकबंदी, भूमि अदल-बदल, व्यक्तिगत खातों में भूमि दर्ज कराने तथा आवेदन प्रक्रिया से संबंधित विभिन्न प्रश्नों के उत्तर दिए।


सभा प्रारम्भ होने से पूर्व बीरोंखाल के निकट स्थित ग्वीन मल्ला गांव के भूमिधरों ने मंच के प्रतिनिधियों को बताया कि उनका गांव वर्ष 2017 से सरकार द्वारा चकबंदी हेतु चयनित किया जा चुका है, लेकिन आज तक धरातल पर चकबंदी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
ग्वीन मल्ला के भूमिधरों ने आग्रह किया कि यदि चकबंदी मंच उत्तराखंड द्वारा अपनाई जा रही स्वैच्छिक एवं आंशिक चकबंदी की प्रक्रिया के अनुसार उन्हें भी सहयोग और मार्गदर्शन दिया जाए, तो वे मंच के आभारी रहेंगे।


इसी क्रम में उसी दिन शाम 5 से 6 बजे के बीच ग्वीन मल्ला गांव में श्री दिनेश रावत, ग्रामप्रधान की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में लगभग 25 भूमिधरों ने ऑनलाइन/ऑफलाइन आवेदन-पत्र भरे तथा चकबंदी कार्यकर्ता श्री मनवर सिंह रावत जी को गांव का चकबंदी मंच समन्वयक मनोनीत किया गया।


अत: बीरोंखाल और ग्वीन मल्ला की बैठकों से यह स्पष्ट हुआ कि पर्वतीय क्षेत्रों के भूमिधर अपनी बिखरी हुई कृषिभूमि को गोल्खातों से व्यक्तिगत खातों में एकत्रित करके विकसित करने के लिए आगे आने को तैयार हैं। अत: अब आवश्यकता है कि सम्बंधित तहसील के अधिकारी स्वैच्छिक चकबंदी के लिए तैयार गाँवों के आवेदनकर्ताओं के साथ बैठ करके उनकी खातावार कुल भूमि बताकर उनके द्वारा अदल बदल किये गये खेतों का चरणबद्ध तरीकों से परिक्षण करके इन स्वैच्छिक प्रयासों को राजस्व विभाग द्वारा धरातल पर आगे बढ़ायें, ताकि भूमिधरों की वर्षों पुरानी मांग केवल आवेदन और कागजों तक सीमित न रहे।