चमोली पेयजल गुणवत्ता समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी गौरव कुमार अधिकारियों को निर्देश देते हुएचमोली पेयजल गुणवत्ता: DM का बड़ा फैसला, अब स्रोतों के साथ घरों से भी लिए जाएंगे पानी के रैंडम सैंपल

चमोली (गोपेश्वर), चमोली पेयजल गुणवत्ता : जनपद में स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी (DM) श्री गौरव कुमार ने एक बेहद निर्णायक कदम उठाया है। शुक्रवार को वी.सी. सभागार गोपेश्वर में जल संस्थान, जल निगम, नगर निकायों और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने चमोली पेयजल गुणवत्ता की नियमित निगरानी के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए अब केवल मुख्य स्रोतों पर ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के घरों से भी पानी के रैंडम सैंपल लेकर नियमित जांच की जाएगी।

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

सीवर और पेयजल लाइनों के इंटरसेक्शन पॉइंट होंगे चिन्हित

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने गोपेश्वर, जोशीमठ एवं बद्रीनाथ के नगरीय क्षेत्रों में सीवर लाइन और पेयजल आपूर्ति लाइन के इंटरसेक्शन पॉइंट (जहां दोनों लाइनें एक-दूसरे को काटती हैं) को तुरंत चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीवर एवं पेयजल लाइनों में कहीं भी किसी प्रकार का लीकेज या आपसी रिसाव नहीं होना चाहिए। यदि दोनों लाइनों के बीच संपर्क की थोड़ी भी संभावना दिखाई देती है, तो संबंधित विभाग तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करें।

दो प्रयोगशालाओं से होगी पानी की सटीक जांच

बैठक में मौजूद विभागीय अधिकारियों ने बताया कि जनपद में चमोली पेयजल गुणवत्ता की सटीक और वैज्ञानिक जांच के लिए वर्तमान में दो विभागीय प्रयोगशालाएं पूरी तरह सक्रिय हैं:

  1. जिला स्तरीय प्रयोगशाला: चमोली (मुख्य)
  2. उप-जिला स्तरीय प्रयोगशाला: कर्णप्रयाग

वर्तमान में जिले के 1,113 गांवों में स्थापित 1,756 पेयजल स्रोतों के माध्यम से जनता को पानी की आपूर्ति की जा रही है। जिलाधिकारी ने इन दोनों प्रयोगशालाओं को आधुनिक संसाधनों और अत्याधुनिक तकनीकी व्यवस्थाओं के साथ हमेशा अपडेट रखने के निर्देश दिए, ताकि पानी की जांच के आंकड़े पूरी तरह सटीक और विश्वसनीय प्राप्त हो सकें।

ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों के लिए विशेष निर्देश

जोखिम वाले स्थानों की निगरानी: नगरीय क्षेत्रों के सभी अधिशासी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे संवेदनशील स्थानों को चिन्हित करें जहां पेयजल दूषित होने का खतरा सबसे अधिक है, और वहां लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें।

जल समितियों की भूमिका: ग्रामीण क्षेत्रों में पानी को प्रदूषण से बचाने के लिए जिलाधिकारी ने स्थानीय जल समितियों को और अधिक प्रभावी एवं सक्रिय बनाने को कहा है।

अधिकारियों का नियमित निरीक्षण: क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पेयजल स्रोतों का नियमित रूप से निरीक्षण करें और प्रदूषण की किसी भी संभावना पर तत्काल एक्शन लें।

बैठक में ये अधिकारी रहे उपस्थित

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अधिशासी अभियंता (जल निगम) राजेश सिंह, अधिशासी अभियंता (जल संस्थान) संजय कुमार सैनी, चिकित्सा विभाग से डॉ. अभिषेक गुप्ता और अधिशासी अधिकारी अनिल कुमार पंत सहित अन्य संबंधित विभागों के आला अधिकारी मौजूद रहे।