राष्ट्र में ऊर्जा एवं कार्वाजनिक पैट्रोलियम क्षेत्र के उपकर्मों की भूमिका पर विचार गोष्टीऊर्जा संरक्षण को जनांदोलन बनाकर आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दें-भगत सिंह कोशियारी एस

ऊर्जा संरक्षण को जनांदोलन बनाकर आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दें-भगत सिंह कोशियारी


नई दिल्ली : देश के महत्वपूर्ण विषय राष्ट्र में ऊर्जा एवं सार्वजनिक पेट्रोलियम क्षेत्र के उपकर्मों की भूमिका पर अमर संदेश समाचार पत्र व पोलिटिकल ट्रस्ट द्वारा रविवार 24 सितंबर को नई दिल्ली के रायसीना रोड स्थित प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में एक विचार गोष्टी एवं ऊर्जा सम्मान का आयोजन किया गया । जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड, पूर्व राज्यपाल महाराष्ट्र एवं गोवा माननीय भगत सिंह कोशियारी जी, पूर्व निदेशक ONGC सुषमा रावत जी मुख्य अतिथि, पूर्व जनरल मैनेजर (HR) ONGC व मौल्यार रिसोर्स फाउंडेशन के संचालक दुर्गा सिंह भंडारी जी विशिष्ट अतिथि, शिक्षाविद और भारतीय जादूगर संघ के अध्यक्ष डॉ के सी पांडेय जी, पर्वतीय कला केंद्र दिल्ली के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार सी एम पपनै जी एवं श्रीराम कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रवि शर्मा जी बतौर अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।

सभी अतिथियों एवं आयोजकों ने दीप प्रज्वलित कर सभागार में ऊर्जा का प्रवाह भरते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मध्य एशिया में चल रहे संकट को देखते हुए हमारे देश में भी ऊर्जा और पेट्रोलियम पर असर देखने को मिल सकता है। इसी विषय पर जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से अमर संदेश समाचार पत्र और पोलिटिकल ट्रस्ट द्वारा सुंदर और सफल आयोजन किया गया।
वक्ताओं ने देश में ऊर्जा और पेट्रोलियम के संकट पर तथ्यों के साथ अपनी बात रखी और सभी को इसके महत्व को समझाते हुए इसके संरक्षण में सहयोग करने को कहा।
पद्मभूषण माननीय भगत सिंह कोशियारी जी ने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम सभी पेट्रोल एवं डीजल की अनावश्यक खपत को कम करने का संकल्प लें, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दें और सौर ऊर्जा जैसे स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा स्त्रोतों को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि ऊर्जा की बजत ही भविष्य की सुरक्षा है। ऊर्जा संरक्षण को जनांदोलन बनाकर आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दें। एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा जब वे महाराष्ट्र के राज्यपाल थे, तो प्रातः सैर पर निकलते थे। तब मैने देखा कि सूर्य का प्रकाश छा जाने पर भी स्टेट लाईट जली रहती थी इस पर मेरे द्वारा संबंधित विभाग को निर्देश दिया, गया जिसके बाद बेकार में जल रही स्टेट लाईटें सूर्य उदय होने से पूर्व ही बंद होने लगी जिससे बिजली की काफी बचत हुई । कहा, अमर संदेश समाचार पत्र प्रमुख अमर चंद्र के कार्यक्रम छोटे होते हैं, छोटा ही बड़ा होता है। सेमिनार का विषय रोचक और महत्वपूर्ण है।


पूर्व निदेशक ओएनजीसी (ONGC) श्रीमती सुषमा रावत ने अपने वक्तव्य में तकनीकी पहलुओं को रखते हुए पेट्रोलियम स्त्रोतों और उनके भण्डारण पर विस्तृत जानकारी देकर ऊर्जा संरक्षण के अहम बिंदुओं को उजागर कर उन्हें अपनाने के लिए सभी को प्रेरित किया। उन्होंने कहा पाइप गैस जहां जा सकती है पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कहा कि, ऑयल अकेले नहीं निकलता उसके साथ कार्बनडाई ऑक्साइड व गैस निकलती है, जिसे पहले जला दिया जाता था। लेकिन अब उस गैस को संरक्षित कर कुकिंग गैस (IGPL) के रूप में लोगों को उपलब्ध कराई जायेगी। उन्होंने अवगत कराया कि आज निर्मित होने वाले बहुत से उत्पाद पेट्रोकैमिकल से जुड़े हुए हैं। हमारे अंदर जागरूकता होनी चाहिए, ऊर्जा बचत हमारी अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करती है।
कहा कि, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की भूमिका देश की मजबूत अर्थव्यवस्था बनाए रखने हेतु आवश्यक व महत्वपूर्ण है। अवगत कराया गया, हमारे देश में गैस बहुत मिलती है। हमारी आज की पीढ़ी अभाव को समझती है भविष्य की पीढ़ी अभाव को नहीं समझ पाएगी, समझा जा सकता है। अवगत कराया गया विदेशों के ऑयल क्षेत्र की कंपनियों में करीब साठ फीसद भारतीय तकनीशियन कार्यरत हैं।

मुख्य वक्ता श्री दुर्गा सिंह भंडारी ने देश के विकास में ऊर्जा क्षेत्र के पीएसयूएस (Psus) की भूमिका उनके योगदान और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया, वर्ष 1956, 1965, के बाद देश में परिवर्तन हुआ। वर्ष 1970 में घरेलू उपयोग हेतु एलपीजी आई। वर्ष 1984 में ऑयल के साथ गैस की ओर भी बढ़े। देश के सम्मुख चुनौती रही, 75 फीसद ऑयल तथा 50 फीसद गैस बाहरी देशों से आयात की जाती थी।
पत्रकार सी एस पपनै जी ने ऊर्जा के साथ-साथ पर्यावरण जागरूकता पर अपने ओजस्वी विचार व्यक्त किये। उन्होंने बेबाक होकर कहा ऊर्जा संकट है नहीं, बनाया गया है या करवाया जा रहा है। ऊर्जा से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का देश के विकास में बड़ा हाथ रहा है। ईंधन के रूप में चीड़ के पेड़ों से स्वाभाविक रूप में बड़ी तादात में गिरे पिरूल का बड़े स्तर पर ईंधन के रूप में प्रयोग कर ऊर्जा की प्राप्ति की जा सकती है। उत्तराखंड के जंगलों में लग रही आग पर नियंत्रण व हिमालयी पर्यावरण व जलवायु विविधता की रक्षा की जा सकती है।

डॉ के सी पांडे ने ऋगवेद का जिक्र करते हुए कहा कि ऋग्वेद का पहले श्लोक ही ऊर्जा से उद्धृत है, जिसमें अग्नि का आह्वान किया गया है। सूर्य से जुड़ा अक्षय ऊर्जा का श्रोत बड़ा है। उक्त ऊर्जा को संचित करना सीख जायें तो बड़ी उम्मीद जग सकती है। उन्होंने कहा, भारत ने सौर ऊर्जा में छलांग लगाई है। चालीस गुना हम आगे बढ़े हैं। इस श्रोत में और अधिक काम करने की जरूरत है।

अमर संदेश पत्र द्वारा कार्यक्रम के बीच में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कुछ लोगों को ऊर्जा सुरक्षा सम्मान-2006 से सम्मानित कर उनके कार्यों को सराहा गया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य भूमिका मंच संचालक की होती है जिसे उत्तरायणी के संस्थापक एवं ऊर्जावान कवी नीरज बवाड़ी जी ने वखूबी निभाया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मिडिया समन्वयक मदन मोहन सती, देवप्रयाग की क्षेत्र पंचायत सदस्य रोशनी चमोली, सुनील नेगी, हरीश असवाल, राजेश्वर पैन्यूली, प्रताप थलवाल, दयाल सिंह नेगी, सुभाष गुसाईं, प्रेम सिंह, रमेश चंद, द्वारिका प्रसाद चमोली, राकेश रावत, प्रताप सिंह नेगी, स्वाति पहाड़ी, प्रकाश मिलनसार, सुभाष नौटियाल, विशन सिंह राणा, गढ़वाली फिल्म अभिनेत्री रिया शर्मा, बबली अधिकारी, अंजु पुरोहित, हरीश चंद्र उपाध्याय, सुजीत ठाकुर, राजू बोहरा, हरीश गोला, रंजना गुप्ता, तरुण पंत, महेंद्र लटवाल, धन लक्ष्मी महतो, संजय आर्या, प्रतापरश्मि सिंह, नीरा झा, कल्पना पाठक, श्रीमती कांति चौहान, मयंक के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, समाजसेवी, लेखक, पत्रकारों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे गणमान्य लोग मौजूद थे।

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