चमोली में मेडिकल लापरवाही के कारण गर्भवती महिला की मौतदुःखद खबर : थराली में प्रसव पीड़ा से तड़पती रही गर्भवती, 6 घंटे बाद किया रेफर, एंबुलेंस में तोड़ा दम

दुःखद खबर : थराली में प्रसव पीड़ा से तड़पती रही गर्भवती, 6 घंटे बाद किया रेफर, एंबुलेंस में तोड़ा दम

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चमोली : उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर दो जिंदगियों पर भारी पड़ गई है। चमोली जनपद के थराली विकासखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में समय पर सही इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टर न मिलने के कारण कुराड़ गांव (आफर तोक) निवासी 35 वर्षीय सरिता देवी और उनके गर्भ में पल रहे नवजात शिशु की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद से मृतका के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है।

5 से 6 घंटे तक नॉर्मल डिलीवरी का भरोसा दिया

परिजनों के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे सरिता देवी को प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) शुरू हुई। वह खुद पैदल चलकर सीएचसी थराली पहुंची थीं। अस्पताल के चिकित्सा स्टाफ ने परिजनों को आश्वासन दिया कि डिलीवरी सामान्य (नॉर्मल) होगी और उन्हें भर्ती कर लिया गया। आरोप है कि नाइट ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने सुबह समय पर चेकअप नहीं किया और कई घंटों तक महिला दर्द से तड़पती रही।

हालत बिगड़ने पर किया हायर सेंटर रेफर

दोपहर करीब 2:00 से 2:30 बजे के बीच जब महिला की स्थिति अत्यधिक बिगड़ गई और पानी की थैली फट गई, तब अस्पताल प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए। डॉक्टरों ने अस्पताल में कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोकोलॉजिस्ट) उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए मरीज को उच्च चिकित्सा केंद्र (कर्णप्रयाग अस्पताल) के लिए रेफर कर दिया। परिजनों का आरोप है कि यदि डॉक्टर पहले ही बता देते कि विशेषज्ञ नहीं हैं, तो वे महिला को तुरंत बड़े अस्पताल ले जाते।

एंबुलेंस की बदहाली और रास्ते में मौत

रेफर किए जाने के बाद महिला को 108 एंबुलेंस से कर्णप्रयाग ले जाया जा रहा था। मृतका के भाई का आरोप है कि जिस एंबुलेंस में उनकी बहन को भेजा गया, उसका ऑक्सीजन सिलेंडर खराब था और पंखा भी बंद था। तड़पते-तड़पते नारायणबगड़ के समीप बगोली के पास सरिता देवी और उनके अजन्मे बच्चे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। कर्णप्रयाग अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने प्रसूता को मृत घोषित कर दिया।

दो मासूम बच्चे हुए बेसहारा

मृतका सरिता देवी अपने पीछे पति नरेंद्र कुमार और दो छोटे बच्चों (नितिन और पायल) को छोड़ गई हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। यह महिला का तीसरा प्रसव था। ग्रामीणों और पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने पहाड़ों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी और बदहाल आपातकालीन परिवहन सेवाओं पर गंभीर रोष व्यक्त करते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) का बयान

मामले पर चमोली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. संजय गुप्ता ने बताया कि थराली सीएचसी में उस वक्त जनरल ड्यूटी डॉक्टर तैनात थे और स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने के कारण मरीज को कर्णप्रयाग रेफर किया गया था। उन्होंने घटना की आधिकारिक जांच के आदेश दे दिए हैं और रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।