देहरादून : राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण ने उत्तराखंड के चार मेडिकल कॉलेजों और सभी जिला अस्पतालों को मरीजों को ओपीडी (OPD) पर्चे के लिए लंबी लाइनों में खड़ा रखने और ऑनलाइन पंजीकरण की लचर सुविधा को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!केंद्र सरकार ने ओपीडी की लंबी कतारों से राहत देने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत लागू ‘स्कैन एंड शेयर’ व्यवस्था लागू की थी। पर राज्य के अस्पतालों की अनदेखी के कारण यह व्यवस्था दम तोड़ती नज़र आ रही है। हालात ये हैं कि प्रतिदिन हजारों मरीजों की ओपीडी होने के बावजूद नाममात्र के ऑनलाइन पर्चे बन रहे हैं।
राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के कड़े रुख के बाद एबीडीएम उत्तराखंड की सीईओ रीना जोशी ने सभी जिला चिकित्सा संस्थानों एवं सभी जिलों के सीएमओ और जिला अस्पताल के अधीक्षकों को इस लापरवाही के लिए नोटिस भेज जवाब मांगा है।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत स्कैन एंड शेयर एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें मरीज क्यूआर कोड स्केन कर आभा आईडी के जरिए ओपीडी पंजीकरण कर सकते हैं। इससे वे लंबी लाइनों में लगने से बच सकते हैं और डिजिटल स्वास्थय रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहता है।
हरिद्वार जिला अस्पताल में प्रतिदिन केवल 20 से 100 मरीज ही इस सुविधा का उपयोग कर रहे हैं। दून के कोरोनेशन अस्पताल में लगभग 800 मरीजों की ओपीडी के मुकाबले सिर्फ 25 से 30 ऑनलाइन पर्चे बन रहे हैं। अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में भी ऑनलाइन पंजीकरण का आंकड़ा अपेक्षा से काफी कम दर्ज किया गया है।
कार्रवाई के बाद दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने व्यवस्था में तेजी दिखाई है। एबीडीएम के लिए अलग काउंटर बनाया गया है और मरीजों को ऑनलाइन पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार पहले जहां लगभग 400 ऑनलाइन पंजीकरण हो रहे थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 820 तक पहुंच गई है। अधिकारियों का कहना है कि अन्य अस्पतालों में भी इसी तरह सुधार के निर्देश दिए गए हैं।

